पुराना नियम · गिनती · अध्याय 16 / 36
गिनती 16
1लेवी के परपोते, कहात के पोते तथा यिसहार के पुत्र कोरह ने एलीआब के पुत्र दातान और अबीराम, तथा रूबेनी पेलेत के पुत्र ओन ने
2इस्राएल प्रजा के दो सौ पचास ऐसे अगुवों को साथ लिया जो मंडली के चुने हुए प्रसिद्ध लोग थे। वे मूसा का सामना करने के लिए उठे।
3इन सबने मूसा और हारून के विरुद्ध संगठित होकर उनसे कहा, “बहुत हो चुका! सारी मंडली का एक-एक व्यक्ति तो पवित्र है, और यहोवा उनके मध्य में भी है। फिर तुम यहोवा की मंडली से अपने को क्यों ऊंचा ठहराते हो?”
4यह सुनकर मूसा मुंह के बल गिरा,
5और उसने कोरह तथा उसके साथियाें से कहा, “कल प्रातःकाल यहोवा दिखा देगा कि उसका कौन है और पवित्र कौन है, और उसे अपने समीप बुला लेगा। वह स्वयं जिसे चुन लेगा उसे अपने समीप ले भी आएगा।
6इसलिए हे कोरह, और उसके सब साथियों, ऐसा करोः अपना-अपना धूपदान ठीक करो।
7कल उनमें आग रखकर यहोवा के सामने धूप देना। जिसको यहोवा चुन लेगा वही पवित्र ठहरेगा। हे लेवियों, बहुत हो चुका, अब बस करो।”
8फिर मूसा ने कोरह से कहा, “हे लेवियों, सुनो!
9क्या यह तुमको छोटी बात मालूम होती है कि इस्राएल के परमेश्वर ने इस्राएल की मंडली में से तुमको अपने समीप लाए, और कि तुम यहोवा के निवासस्थान की सेवा करो, तथा मंडली के सामने खड़े होकर उसकी सेवा-टहल करो,
10और तुझे तथा तेरे साथ सब लेवियों, अर्थात् तेरे भाइयों को अपने पास बुला लिया है? अब क्या तुम याजक-पद के भी अभिलाषी हो गए हो?
11इसीलिए तू अपने सब साथियों सहित यहोवा के विरोध में संगठित होकर एकत्रित हुआ है। फिर हारून कौन है कि तुम उसके विरुद्ध कुड़कुड़ाते हो?”
12इसके बाद मूसा ने एलीआब के पुत्रों, दातान और अबीराम को बुलवा भेजा, परन्तु उन्होंने कहा, “हम नहीं आएंगे।
13क्या यह छोटी बात है कि तू हमको ऐसे देश से निकाल लाया है जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं कि हमको जंगल में मार डाले? फिर उसके पर तू हम पर अधिकार जताना चाहता है?
14तूने हमें न तो किसी ऐसे देश में पहुंचाया जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं और न ही हमको खेतों और दाख की बारियों का वारिस बनाया है। क्या तू इन लोगाें की आंखें निकाल डालेगा? हम तो नहीं आएंगे।”
15तब मूसा ने अति क्रोधित होकर यहोवा से कहा, “तू उनके बलिदानों पर ध्यान न दे। मैंने उनसे न तो एक गदहा लिया न उनमें से किसी की कोई हानि की है।”
16फिर मूसा ने कोरह से कहा, “तू और तेरे सब साथी कल यहोवा के सामने उपस्थित हो। हां, तू और वे दोनों हारून के साथ उपस्थित हो।
17तब तुम में से प्रत्येक अपना धूपदान लेकर उसमें धूप रखे। तब तुम ढाई सौ लोगों में से प्रत्येक अपना धूपदान यहोवा के सामने ले जाए। हां तू और हारून भी, अपने-अपने धूपदान लेकर जाना।”
18अतः प्रत्येक ने अपना धूपदान लिया, उस पर अंगार रखे और उस पर धूप डाला। तब वे मूसा और हारून के साथ मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खड़े हुए।
19इस प्रकार कोरह ने सारी मंडली को उनके विरुद्ध मिलापवाले तम्बू के द्वार पर एकत्रित कर लिया। तब यहोवा का तेज सारी मंडली पर प्रगट हुआ।
20और यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
21“इस मंडली के बीच से अलग हो जाओ जिससे मैं इनको तत्काल भस्म कर डालू।”
22परन्तु वे मुंह के बल गिरकर कहने लगे, “हे परमेश्वर, हे सब प्राणियों के आत्माओं के परमेश्वर, क्या तू एक व्यक्ति के पाप के कारण सारी मंडली पर कोप करेगा”?
23तब यहोवा ने मूसा से कहा,
24“सम्पूर्ण समाज से कह, कि कोरह, दातान और अबीराम के तम्बुओं के आसपास से दूर हट जाओ।”
25तब मूसा उठा, और दातान और अबीराम के पास गया और इस्राएल के प्राचीन उसके पीछे-पीछे चले।
26तब मूसा ने सारी मंडली से कहा, “इन दुष्टों के तम्बुओं से दूर हट जाओ, और उनकी किसी वस्तु को न छुओ ऐसा न हो कि तुम भी उनके पाप के कारण मर मिटो।”
27अतः वे कोरह, दातान और अबीराम के तम्बुओं के आसपास से हट गए। फिर दातान और अबीराम बाहर निकलकर अपनी पत्नियों, पुत्रों तथा बाल-बच्चों के साथ अपने-अपने तम्बू के द्वार पर खड़े हुए।
28तब मूसा ने कहा, “इससे तुम जान लोगे कि ये सब काम करने के लिए यहोवा ने मुझे भेजा है क्योंकि मैंने अपनी इच्छा से कुछ नहीं किया।
29यदि इन मनुष्यों की मृत्यु अन्य मनुष्यों के समान हो या इन पर वैसा बीते जैसा सबके साथ बीतता है तो समझना कि यहोवा ने मुझको नहीं भेजा।
30परन्तु यदि यहोवा कोई असाधारण कार्य करे, और भूमि अपना मुंह पसारकर उनको उनके सब कुछ समेत निगल जाए, तथा वे जीते जी अधोलोक में समा जाएं तो यह समझ लेना कि इन मनुष्यों ने यहोवा का अपमान किया है।”
31उसके यह कहते ही भूमि उनके पांवों तले फट गई,
32और पृथ्वी ने मुंह पसार कर उनको, उनके घरानों को, कोरह के सब साथियों को तथा उनकी धन-सम्पत्ति को एकाएक निगल लिया।
33इस प्रकार वे तथा उनके सम्पूर्ण घर-बार अधोलोक में समा गए, और पृथ्वी उनके ऊपर पुनः समतल हो गई। इस प्रकार वे मंडली में से नष्ट हो गए।
34तब जितने इस्राएल उनके चारों ओर थे वे उनकी चिल्लाहट सुनकर यह कहते हुए भागे, “कहीं पृथ्वी हमको भी निगल न ले।”
35तब यहोवा की ओर से अग्नि ने निकलकर धूप जलाने वाले उन ढाई सौ मनुष्यों को भस्म कर डाला।
36तब यहोवा ने मूसा से कहा,
37“हारून याजक के पुत्र एलीआजार से कह, कि वह उन धूपदानों को इन लपटों में से निकाल ले क्योंकि वे पवित्र है। फिर अंगारों को तू इधर-उधर छितरा दे।
38जिन पुरुषों ने पाप करके अपने प्राणों की हानि उठाई उनके धूपदानों से वेदी को मढ़ने के लिए पत्तर बनाए जाएं क्योंकि उन्होंने उनको यहोवा के सामने प्रस्तुत किया था, इसलिए वे पवित्र है। वे इस्राएलियों के लिए एक चिह्न ठहरेंगे।”
39अतः भस्म कर दिए जाने वाले व्यक्तियों ने कांसे के जिन धूपदानों में धूप जलाया था उनको एलीआजार याजक ने लिया और वेदी पर मढ़ने के लिए पीट-पीट कर उनके पत्तर बनवा दिए।
40जिससे वे इस्राएलियों के लिए इस बात का स्मृति-चिह्न ठहरें कि हारून के वंश के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति यहोवा के सामने धूप जलाने न आए, कि वह कोरह और उसके दलवालों के समान नष्ट हो जाए-जैसा कि यहोवा ने मूसा के द्वारा उससे कहा था।
41दूसरे दिन इस्राएलियों की सारी मंडली मूसा और हारून के विरुद्ध यह कहकर कुड़कुड़ाने लगी, “तुमने ही यहोवा के लोगों को मरवा डाला है।”
42परन्तु ऐसा हुआ कि मंडली के लोग जब मूसा और हारून के विरुद्ध एकत्रित हुए तब उन्होंने मिलापवाले तम्बू की ओर दृष्टि की और देखो, एक बादल ने उसे छा लिया तथा यहोवा का तेज प्रकट हुआ।
43तब मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू के सामने आए।
44और यहोवा ने मूसा से कहा,
45इस मंडली के बीच से हट जाओ कि मैं इन लोगों को तत्काल भस्म कर दू।” तब वे मुंह के बल गिरे।
46और मूसा ने हारून से कहा, “तू अपना धूपदान ले और उसमें वेदी पर से अंगारे रखकर उस पर धूप डाल। तब उसको तुरन्त मंडली के पास ला, और उनके लिए प्रायश्चित्त कर क्योंकि यहोवा का कोप भड़का है, और महामारी फैलने लगी है।”
47इसलिए मूसा के आज्ञानुसार हारून धूपदान लेकर मंडली के बीच दौड़ता गया क्योंकि महामारी तो लोगों में फैलने लगी थी। अतः उसने आग पर धूप डाला और लोगों के लिए प्रायश्चित्त किया।
48तब वह मृतकों और जीवितों के बीच खड़ा हो गया जिससे महामारी थम गई।
49कोरह के कारण मरने वालों के अतिरिक्त महामारी से मरने वालों की संख्या चौदह हजार सात सौ थी।
50इसके बाद हारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर मूसा के पास लौट आया क्योंकि महामारी थम चुकी थी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)