पुराना नियम · गिनती · अध्याय 24 / 36
गिनती 24
1जब बिलाम ने देखा कि यहोवा को यही भाया है कि वह इस्राएल को आशीष दे, तो वह पहले की भांति शकुन विचारने नहीं गया, बल्कि उसने अपना मुंह जंगल की ओर फेर लिया।
2और बिलाम ने दृष्टि की और इस्राएलियों को गोत्र-गोत्र के अनुसार पड़ाव डाले हुए देखा, और परमेश्वर का आत्मा उस पर उतरा।
3तब उसने अपना गूढ़ वचन आरम्भ कियाः “बओर के पुत्र बिलाम की यह वाणी है अर्थात् उस व्यक्ति की वाणी जिसकी आंखे खोली गई है।
4यह उस व्यक्ति की वाणी है जो परमेश्वर के वचनों को सुनता है और दण्डवत् करते हुए भी खुली आंखों से सर्वशक्तिमान का दर्शन पाता है,
5हे याकूब, तेरे तम्बू, और हे इस्राएल, तेरे निवास कितने मनोहर हैं!
6वे उन घाटियाें के सदृश हैं जो दूर-दूर तक फैली हुई हैं, उन उघानों के समान हैं जो नदी के तट पर पाए जाते हैं, उन अगर के वृक्षों के सदृश हैं जो यहोवा के द्वारा रोपे गए हैं उन देवदारों के समान हैं जो जलाशयों के निकट पाए जाते हैं?
7उसके गागरों से जल उमड़ता रहेगा, और उसका बीज अनेक जलाशयों में जा पड़ेगा, उसका राजा अगाग से उच्च होगा और उसका राज्य उन्नत होगा।
8परमेश्वर उसे मिस्र से निकाल ले आ रहा है, वह तो उसके लिए जंगली सांड़ के सींग के समान है। वह अपने बैरी राष्ट्रों को निगल जाएगा, और उनकी हडिóयों को चकनाचूर कर डालेगा, और उनको अपने बाणों से छिन्न-भिन्न कर डालेगा।
9वह घात लगाकर बैठता है, वह सिंह की भांति, हां, सिंहनी की भांति लेटता है, कौन उसे जगाने का दुस्साहस करेगा? जो कोई तुझे आशीष दे, वह आशीषित हो और जो कोई तुझेे शाप दे, वह शापित हो।”
10तब बालाक का क्रोध बिलाम पर भड़क उठा, और उसने ताली पीटकर बिलाम से कहा, “मैंने तो तुझे अपने शत्रुओं को शाप देने के लिए बुलाया था, परन्तु देख तूने इन तीनों बार उन्हें आशीर्वाद ही आशीर्वाद दिया!
11इसलिए तू अपने स्थान को तुरन्त भाग जा। मैंने तो सोचा था कि तुझे अति सम्मानित करूंगा, परन्तु देख, यहोवा ने तुझे सम्मान पाने से वंचित रखा है।”
12और बिलाम ने बालाक से कहा, “जो संदेशवाहक तूने मेरे पास भेजे थे, क्या मैंने उनसे यह नहीं कहा था,
13कि चाहे बालाक अपना घर सोने और चांदी से भर कर मुझे दे फिर भी मैं यहोवा की आज्ञा के विरुद्ध अपने मन से न तो भला कर सकता हूं और न बुरा, वरन् यहोवा जो कुछ कहेगा, वही मैं कहूंगा?
14अब सुन, मैं तो अपने लोगों के पास जा ही रहा हूं; आ, मैं तुझे बता दूं कि आनेवाले दिनों में ये लोग तेरी प्रजा के साथ क्या-क्या करेंगे।”
15और वह अपना गूढ़ वचन आरम्भ करके कहने लगा, बोओर के पुत्र बिलाम की यह वाणी है, अर्थात् उस व्यक्ति की वाणी- जिसकी आंखें खोली गई है।
16यह उस व्यक्ति की वाणी है जो परमेश्वर के वचनों को सुनता है और परमप्रधान के ज्ञान को जानता है और दण्डवत् करते हुए भी खुली आंखों से सर्वशक्तिमान के दर्शन पाता है।
17मैं उसे देखता तो हूं, किन्तु अभी नहीं, मैं उस पर दृष्टिपात तो करता हूं, किन्तु निकट से नही। याकूब में से एक तारा उदित होगा, और इस्राएल में से एक राजदण्ड उठेगा, वह मोआब के मस्तक को चूर-चूर कर डालेगा और शेतवंशियों को मिट्टी में मिला देगा।
18एदोम उसके अधिकार में हो जाएगा, उसके शत्रु, सेईर के लोग भी उसके अधीन हो जाएंगे; परन्तु इस्राएल वीरता का प्रदर्शन करेगा।
19याकूब में से एक आकर प्रभुता करेगा, और वह नगर में बचे हुए लोगाें को नष्ट कर डालेगा।”
20और उसने अमालेक की ओर दृष्टि की, और अपना गूढ़ वचन आरम्भ कियाः “अमालेक तो जातियों में प्रथम था, किन्तु उसका अन्त विनाश होगा।”
21तब उसने केनियों की ओर दृष्टि की, और अपना गूढ़ वचन आरम्भ कियाः “तेरा निवासस्थान सुदृढ़ तो है, और तेरा बेसरा चट्टान पर बना है।
22फिर भी केनियों, तुम उजड़ जाओगे, अश्शूर तुम्हे बन्दी बनाकर कब तक रखेगा?”
23और उसने पुनः अपना गूढ़ वचन आरम्भ कियाः “हाय! जब परमेश्वर यह करेगा तब कौन जीवित बचेगा?
24परन्तु कित्तियों के तट से जहाज आएंगे, और अश्शूर तथा एबेर पर आक्रमण करेंगे, इस प्रकार ये भी नष्ट हो जाएंगे।”
25तब बिलाम उठा और वहां से अपने स्थान को लौट गया, और बालाक ने भी अपना मार्ग लिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)