पुराना नियम · गिनती · अध्याय 4 / 36
गिनती 4
1फिर यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
2“लेवियों में से कहातियों की उनके कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार गणना करो,
3अर्थात् उनकी जो तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु के हैं और मिलापवाले तम्बू में सेवा करने के लिए भरती है।
4मिलापवाले तम्बू में परमपवित्र वस्तुओं के सम्बन्ध में कहातियों का यही कार्य होगा।
5जब-जब छावनी का प्रस्थान हो, तब-तब हारून और उसके पुत्र भीतर प्रवेश करें और बीच वाले पर्दे को उतार कर उससे साक्षी के सन्दूक को ढांप दें;
6वे सुइसों की खाल का आवरण उस पर डाल दें; तथा उसके ऊपर पक्के नीले रंग का कपड़ा डालें और डंडों को लगाए।
7भेंट वाली रोटी की मेज पर नीला कपड़ा बिछाकर उस पर परात, चम्मच, करछों और उंडेलने के कटोरों को रखें, तथा नित्य की रोटी भी उस पर रहे।
8फिर वे उन पर लाल रंग का बुना हुआ कपड़ा बिछाकर सुइसों की खाल के आवरण से उसे ढांप दें तथा मेज के डंडों को लगाए।
9फिर वे नीले कपड़े को लेकर दीपकों, गुलतराशों, गुलदानों समेत उजियाला देने वाले दीवट को और उसके सब तेल के पात्रों को जो उसके काम में आते हैं ढांप दें;
10और उसे सब पात्रों सहित सुइसों की खाल के आवरण में रखकर डंडों पर रख दे।
11फिर वे सोने की वेदी पर नीला कपड़ा बिछा कर और उसे सुइसों की खाल के आवरण से ढांप कर उसमें डंडों को लगा दे।
12फिर सेवा-टहल के काम में आने वाले सारे सामान को, जिससे पवित्रस्थान में सेवा-टहल होती है, नीले कपड़े में लपेटकर सुइसों की खाल के आवरण में रख कर उन्हें डंडों पर रख दे।
13फिर वे वेदी पर से सब राख उठाकर उस पर बैंजनी रंग का कपड़ा बिछाए।
14तब वे वेदी पर के सेवा-टहल के काम में आने वाले सब सामान अर्थात् करछे, कांटे, फावड़ियां और कटोरे-वेदी के सब सामान पर सुइयों की खाल बिछा दें तथा डंडों को लगा दे।
15जब हारून और उसके पुत्र, छावनी के प्रस्थान के समय पवित्रस्थान की पवित्र वस्तुओं और उसके सब सामान को ढांकने का कार्य पूर्ण कर चुकें तो कहाती उन्हें उठाकर ले जाने को आए। वे किसी पवित्र वस्तु को न छुएं कि कहीं मर न जाए। मिलापवाले तम्बू की ये ही वस्तुएं कहातियों को उठाकर ले जाना है।
16प्रकाश देने के लिए तेल, सुगन्ध देने के लिए धूप, तथा अन्नबलि का अन्न और अभिषेक का तेल, अर्थात् निवासस्थान और उसमें की सब वस्तुएं, पवित्रस्थान और उसमें की सब वस्तुएं, देख-भाल के लिए हारून के पुत्र एलीआजार को सौंपी जाए।”
17तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
18“कहाती कुल के घरानों को लेवियों में से नष्ट न होने देना।
19उनके साथ ऐसा करना कि जब-जब वे परमपवित्र वस्तुओं के समीप आएं तो न मरें वरन् जीवित रहें: हारून और उसके पुत्र भीतर जाएं और प्रत्येक को उसका कार्य और भार निर्धारित कर दे।
20वे पवित्र वस्तुओं को देखने के लिए क्षण भर भी भीतर न जाएं कि कहीं मर न जाए।”
21तब यहोवा ने मूसा से कहा,
22“गेर्शोनियों की भी उनके पूर्वजों के कुलों और घरानों के अनुसार गिनती कर।
23तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु वाले जितने पुरुष मिलापवाले तम्बू में सेवा करने आते हैं उनकी गिनती कर ले।
24सेवा करने और भार उठाने में गेर्शोनियों के घरानों के लोगों की यह सेवा होगीः
25वे तम्बू के परदों, मिलापवाले तम्बू और उसके आवरण और सुइसों की खाल के आवरण जो उन्हें ढांपे रहता है तथा मिलापवाले तम्बू के द्वार के परदे,
26तथा आंगन के परदे, आंगन के द्वार के परदे, उनकी डोरियां, उनमें काम में आने वाले सारे सामान-इन सबको वे उठाकर ले जाया करे। इनके अतिरिक्त जो कुछ करने को है उसे वे करे।
27गेर्शोनियों द्वारा सभी सेवा-कार्य, भार उठाना, तथा अन्य सभी कार्य हारून और उसके पुत्रों की आज्ञा पर ही किए जाए। जो-जो भार उन्हें उठाना है उनका उत्तरदायित्व तुम्हीें उन्हें सौंपोगे।
28मिलापवाले तम्बू में गेर्शोनियों के घरानों की सेवा यह है। उनके कार्य हारून याजक के पुत्र ईतामार के द्वारा संचालित हो।
29“मरारियों को भी तू उनके कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार गिन ले।
30तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु वाले जितने पुरुष मिलापवाले तम्बू की सेवा में आते हैं उनकी गिनती कर ले।
31उनके लिए मिलापवाले तम्बू में भार उठाने की सारी सेवा यह है कि वे निवास के तख़्ते, बेंड़ें, खम्भे और कुर्सियां,
32आंगन के चारों ओर के खम्भे, उनकी कुर्सियां, खूंटे, डोरियां, काम में आनेवाले भिन्न-भिन्न प्रकार के सामान उठाए। जिन-जिन वस्तुओं का भार उसे उठाना है, उनका उत्तरदायित्व नाम ले-लेकर हर एक को सौंप दे।
33हारून याजक के पुत्र ईतामार के संचालन में मरारियों के घरानों की सारी सेवा जो उन्हें मिलापवाले तम्बू के विषय में करनी होगी वह यही है।”
34तब मूसा, हारून और मंडली के प्रधानों ने कहातियों की गणना उनके कबीलों तथा पूर्वजों के घरानों के अनुसार की,
35अर्थात् तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु वालों की, जो मिलाप वाले तम्बू की सेवा में आते थे।
36घरानों के अनुसार उनके गिने हुए पुरुष दो हजार सात सौ पचास थे।
37कहातियों के घरानों में से जितने पुरुष मिलापवाले तम्बू में सेवा करते थे उन सब की संख्या इतनी ही थी। यहोवा की आज्ञा के अनुसार जो उसने मूसा के द्वारा दी थी, मूसा और हारून ने उन्हें गिना।
38गेर्शोनियों में से जो अपने कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार गिने गए,
39अर्थात् तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु वाले जो मिलापवाले तम्बू में सेवा करने आते थे,
40उनके गिने हुए पुरुष कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार दो हजार छः सौ तीस थे।
41गेर्शोनियों के घरानों में से जितने गिने हुए पुरुष मिलापवाले तम्बू में सेवा करते थे, वे इतने ही थे, जिन्हें यहोवा की आज्ञा के अनुसार मूसा और हारून ने गिना।
42मरारियों में से जो अपने कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार गिने गए,
43अर्थात् तीस वर्ष से पचास वर्ष की आयु वाले जो मिलापवाले तम्बू में सेवा करने आते थे,
44उनके गिने हुए पुरुष घरानों के अनुसार तीन हजार दो सौ थे।
45मरारियों के घरानों में से जितने पुरुष गिने गए, वे इतने ही थे, जिन्हें यहोवा की आज्ञा के अनुसार जो मूसा के द्वारा मिली थी, मूसा और हारून ने गिना।
46लेवियों में से गिने हुए पुरुष जिन्हें मूसा और हारून और इस्राएलियों के प्रधानों ने उनके कुलों और पूर्वजों के घरानों के अनुसार गिना,
47जो तीस वर्ष से लेकर पचास वर्ष की आयु के थे, अर्थात् जितने मिलापवाले तम्बू में सेवा करने और बोझ उठाने आते थे,
48उन सबकी संख्या आठ हजार पांच सौ अस्सी थी।
49उस आज्ञा के अनुसार जो यहोवा ने मूसा को दी थी, वे सब सेवा करने अथवा बोझ उठाने के लिए गिने गए, जैसा कि यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)