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पुराना नियम · गिनती · अध्याय 5 / 36

गिनती 5

1तब यहोवा ने मूसा से कहा,

2“इस्राएलियों को यह आज्ञा दे कि वे प्रत्येक कोढ़ी को और प्रत्येक प्रमेह के रोगी को और उन सब को जो लोथ के कारण अशुद्ध हो गए हों, छावनी से बाहर निकाल दे।

3उनको चाहे वे पुरुष हों अथवा स्त्री, छावनी से बाहर कर दे, कि वे अपनी छावनी को जिसके मध्य मैं निवास करता हूं अशुद्ध न कर डाले।”

4और इस्राएलियों ने ऐसा ही किया और उन्हें छावनी से बाहर कर दिया। जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी, इस्राएलियों ने ठीक वैसा ही किया।

5तब यहोवा ने मूसा से कहा,

6“इस्राएलियों से कह कि यदि कोई पुरुष या स्त्री यहोवा के विरुद्ध विश्वासघात करते हुए कोई ऐसा पाप करे जो मनुष्य किया करते हैं और दोषी ठहरे,

7तब वह अपने किए हुए पापों को मान ले और पूरी रीति से क्षति-पूर्ति करे। और इसके अतिरिक्त पांचवां भाग और भी मिलाकर उसे दे दे जिसकी उसने हानि की हो।

8यदि उस पुरुष का कोई कुटुम्बी न हो जिसको उस हानि की क्षति-पूर्ति का दाम दिया जा सके, तो वह दाम यहोवा को दिया जाए और वह याजक का हो, और वह प्रायश्चित्त वाले मेढ़े के अतिरिक्त हो जिससे उसके लिए प्रायश्चित्त किया जाए।

9और प्रत्येक पवित्रवस्तु जिसे इस्राएल भेंट के रूप में याजक के पास लाएं, वह उसी की हो।

10इस प्रकार प्रत्येक पुरुष की पवित्र की हुई वस्तु उसकी हो, और जो वस्तु याजक को दी जाए, वह उसकी ठहरे।”

11तब यहोवा ने मूसा से कहा,

12“इस्राएलियों से यह कह कि यदि किसी पुरुष की पत्नी बुरी चाल चले और अपने पति से विश्वाघात करे,

13और किसी दूसरे पुरुष ने उसके साथ कुकर्म किया हो, और उसका पति इससे अनभिज्ञ हो, और यह बात उस पर प्रकट न हो, यघपि वह भ्रष्ट हो गई हो और उसके विरुद्ध कोई साक्षी न हो, और वह कुकर्म करते हुए पकड़ी न गई हो,

14और उसके पति के मन में जलन उत्पन्न हो, और वह अपनी पत्नी से डाह करने लगे, जबकि वह अशुद्ध हो चुकी है, अथवा उसके पति के मन में जलन उत्पन्न हो जब कि वह अशुद्ध नहीं हुई हो,

15तब वह पुरुष अपनी पत्नी को याजक के पास लाए, और उसके लिए एपा का दसवां भाग जौ का आटा भेंट चढ़ाने के लिए ले आए पर उस पर वह तेल न डाले और न उसपर लोबान रखे, क्योंकि वह अन्नबलि जलन की है, स्मरण दिलाने वाली अर्थात् अधर्म का स्मरण दिलाने वाली अन्नबलि है।

16“तब याजक उस स्त्री को समीप ले जाकर यहोवा के सम्मुख खड़ा करे।

17और याजक मिट्टी के बर्तन में पवित्र जल ले और मिलापवाले तम्बू की भूमि से धूल लेकर उस जल में डाल दे।

18तब याजक उस स्त्री को यहोवा के सामने खड़ा रखे और उसके सिर के बाल खुलवा दे और स्मरण दिलाने वाले अन्नबलि को जो जलन की अन्नबलि है उसके हाथ में रख दे, और याजक हाथ में वह कड़वा जल लिए रहे जो शाप को लाता है।

19और याजक उससे शपथ ले और उस स्त्री से कहे, कि यदि किसी पुरुष ने तेरे साथ कुकर्म नहीं किया हो और तू अपने पति के अधिकार में रहते हुए किसी दूसरे के साथ अशुद्ध नहीं हुई हो, तो तुझ पर शाप ले आने वाले इस कड़वे जल का कोई प्रभाव न पड़े।

20पर यदि तू अपने पति के अधीन होते हुए पथ-भ्रष्ट होकर अशुद्ध हो गई हो और यदि तू ने अपने पति को छोड़ किसी दूसरे के साथ सम्भोग किया हो तो-

21तब याजक उस स्त्री को शाप देनेवाली शपथ खिलाकर उससे कहे-‘यहोवा तेरी जांघ को सड़ाए, और तेरा पेट फुलाए, और तुझे तेरे लोगों में शाप और कलंक ठहराए,

22और यह शाप लानेवाला जल तेरे पेट के भीतर जाकर उसे फुलाए और तेरी जांघ को सड़ाए!’ और वह स्त्री कहे, ‘आमीन, आमीन!’

23“तब याजक उन शापों को एक चर्मपत्र पर लिखकर उनको उसी कड़वे जल में धो डाले

24और शाप वाला कड़वा जल उस स्त्री को पिला दे, कि वह शाप वाला जल उसके पेट में जाकर कड़वाहट उत्पन्न करे।

25और याजक उस स्त्री के हाथ से जलन वाले अन्नबलि को लेकर यहोवा के सम्मुख हिलाए और उसे वेदी के पास ले आए।

26और फिर याजक स्मरण दिलाने वाली बलि के रूप में मुट्ठी भर अन्नबलि लेकर उसे वेदी की आग में जला दे, इसके बाद याजक वह जल स्त्री को पिलाए।

27और जब वह उसे जल पिला चुके, तब यह होगा कि यदि वह स्त्री अशुद्ध हो चुकी हो और अपने पति से उसने विश्वासघात किया हो तो वह शाप लाने वाला जल उसके पेट में कड़वाहट उत्पन्न करेगा, और उसका पेट फूल जाएगा और उसकी जांघ सड़ जाएगी, और वह स्त्री अपने लोगों में शापित ठहरेगी।

28पर यदि वह स्त्री अशुद्ध नहीं हुई हो, पर निर्दोष हो तो वह मुक्त होगी और उसके बाल-बच्चे उत्पन्न होंगे।

29जलन की व्यवस्था यही है। यदि पत्नी अपने पति के अधीन रहते हुए पथ-भ्रष्ट होकर अशुद्ध हो जाए,

30अथवा यदि पुरुष के मन में जलन उत्पन्न हो और वह अपनी पत्नी से डाह करने लगे, तब वह उसे यहोवा के सम्मुख खड़ी करे और याजक उस पर यह सम्पूर्ण व्यवस्था लागू करे।

31तब पुरुष अधर्म से मुक्त ठहरेगा और वह स्त्री अपने अधर्म का बोझ स्वयं उठाएगी।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)