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पुराना नियम · गिनती · अध्याय 6 / 36

गिनती 6

1यहोवा ने मूसा से फिर कहा,

2“इस्राएलियों से कह, ‘जब कोई पुरुष या स्त्री विशेष मन्नत, अर्थात् नाजीर की मन्नत मानकर अपने को यहोवा के लिए समर्पित करे,

3तो वह मदिरा और मादक पेय-पदार्थों से अलग रहे। वह न मदिरा और न शराब का बना सिरका पीए, न अंगूर का कोई रस पीए। वह न ताजा, न सूखा अंगूर खाए।

4वह अपने अलगाव की पूर्ण अवधि तक बीज से लेकर छिलके तक दाखलता से उत्पन्न कोई वस्तु न खाए।

5अपने मन्नत की पूर्ण अवधि तक कभी उसके सिर पर उस्तरा न फिरे। जितने दिनों के लिए उसने अपने को यहोवा के लिए अलग किया है उतने दिन वह पवित्र बना रहे और अपने सिर के बालों की लटों को बढ़ने दे।

6‘यहोवा के लिए अपने अलगाव की पूर्ण अवधि तक वह किसी शव के पास न जाए।

7वह अपने पिता या अपनी माता, अपने भाई या अपनी बहन की मृत्यु पर भी अपने को अशुद्ध न करे, क्योंकि परमेश्वर के लिए उसके अलगाव का चिह्न उसके सिर पर है।

8अपने अलगाव की पूर्ण अवधि तक वह यहोवा के लिए पवित्र है।

9‘परन्तु यदि कोई मनुष्य उसके समीप अचानक मर जाए और उसके समर्पित सिर के बाल अशुद्ध हो जाएं तो वह अपने पवित्र होने के दिन, अर्थात् सातवें दिन अपना सिर मुड़ाए।

10फिर वह आठवें दिन दो पंडुक, या कबूतरी के दो बच्चे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास लाए।

11तब याजक एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि करके चढ़ाए, और उसके लिए प्रायश्चित्त करे, क्योंकि वह शव के कारण पापी ठहरा है, और उसी दिन उसके सिर को पवित्र करे।

12तब वह अपनी मन्नत की अवधि को यहोवा के लिए पुनः समर्पित करे, और दोषबलि के लिए एक वर्ष का मेमना लाए परन्तु उसकी मन्नत के बीते हुए दिन व्यर्थ गिने जाएं क्योंकि उसका अलगाव भ्रष्ट हो गया था।

13‘नाजीर की व्यवस्था यह है कि जब उसके अलगाव की अवधि पूरी हो जाए तब वह मिलापवाले तम्बू के द्वार पर लाया जाए।

14फिर यहोवा के लिए चढ़ावा चढ़ाएः होमबलि के लिए एक वर्ष का दोषरहित एक मेमना, पापबलि के लिए दोषरहित एक वर्ष की भेड़ की बच्ची, तथा मेलबलि के लिए दोषरहित एक मेढ़ा,

15और अख़मीरी रोटियों की एक टोकरी अर्थात् तेल से सने मैदे के फुलके, तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी पपड़ियां, और उन बलियों के अन्नबलि और अर्घ।

16तब याजक इन सब को यहोवा सामने प्रस्तुत करे, और नाजीर पापबलि तथा होमबलि का चढ़ावा चढ़ाए।

17फिर वह अख़मीरी रोटियों की टोकरी के साथ मेढ़े को यहोवा के लिए मेलबलि करके चढ़ाए। इसी प्रकार याजक इसका अन्नबलि और अर्घ भी चढ़ाए।

18तब नाजीर अपने सिर के समर्पित बाल मिलापवाले तम्बू के द्वार पर मुड़वाए और अपने समर्पित बालों को उस अग्नि में डाल दे जो मेलबलि के नीचे हो।

19जब नाजीर अपने समर्पित बालों का मुंडन करवा चुके तब याजक मेढ़े का उबला हुआ कन्धा, टोकरी से एक अख़मीरी रोटी, और एक अख़मीरी पपड़ी ले, और उसको नाजीर के हाथों पर रख दे।

20फिर हिलाने की भेंट के लिए याजक इन वस्तुओं को यहोवा के सामने हिलाए। बलि की हिलाई हुई छाती और उठाई हुई जांघ समेत ये भी याजक के लिए पवित्र ठहरे। इसके बाद नाजीर दाखरस पी सकेगा।’

21“नाजीर की व्यवस्था यही है। इसी के अनुसार वह यहोवा के लिए अपनी मन्नत का चढ़ावा तथा इससे अधिक और जो कुछ वह चढ़ा सके अपनी मन्नत के अनुसार चढ़ाए। जैसी उसने मन्नत मानी हो वैसे ही अपने अलगाव की व्यवस्था के अनुसर उसे करना होगा।”

22फिर यहोवा ने मूसा से कहाः

23“हारून और उसके पुत्रों से यह कह, ‘तुम इस्राएलियों को इस प्रकार आशीर्वाद देना। उनसे कहनाः

24यहोवा तुझे आशीष दे और तेरी रक्षा करे;

25यहोवा तुझ पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, और तुझ पर अनुग्रह करे;

26यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे, और तुझे शान्ति दे।’

27इस प्रकार वे मेरा नाम इस्राएलियों पर रखें, और मैं उन्हें आशीष दिया करूंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)