पुराना नियम · नीतिवचन · अध्याय 28 / 31
नीतिवचन 28
1दुष्ट तब भी भागते हैं जबकि कोई उनका पीछा न करता हो, पर धर्मी तो सिंह के समान निडर रहते है।
2देश में अराजकता हो तो कई शासक बन बैठते हैं, परन्तु एक समझदार और ज्ञानवान मनुष्य के कारण देश में स्थिरता रहती है।
3निर्धन का कंगाल को दबाना उस भारी वर्षा के समान है जो कुछ भी भोजन-वस्तु नहीं छोड़ती।
4जो व्यवस्था को त्याग देते हैं वे दुष्टों की प्रशंसा करते हैं, पर जो व्यवस्था को मानते हैं वे उनका विरोध करते है।
5बुरे लोग न्याय को नहीं समझते, परन्तु जो यहोवा की खोज में रहते हैं, वे सब कुछ समझते है।
6खरी चाल चलने वाला निर्धन, टेढ़ी चाल चलने वाले धनी से उत्तम है।
7जो व्यवस्था का पालन करता है, वह समझदार पुत्र होता है, परन्तु जो खाने और उड़ाने वालों का साथी होता है, वह अपने पिता को लज्जित करता है।
8जो ब्याज और सूदखोरी के द्वारा अपना धन बढ़ाता है, वह उस मनुष्य के लिए उसे संचित करता है जो निर्धनों पर दया करता है।
9जो व्यवस्था को सुनने से अपना कान फेर लेता है, उसकी प्रार्थना भी घृणित ठहरती है।
10जो खरे लोगों को भटका कर बुरी राह में ले चलता है, वह स्वयं गड्हे में गिरेगा, परन्तु निर्दोष लोग मीरास में अच्छी वस्तुओं को पाएंगे।
11धनी मनुष्य अपनी दृष्टि में बुद्धिमान होता है, परन्तु समझदार निर्धन तो उसे परख लेता है।
12जब धर्मी विजयी होते हैं, तो बड़ी महिमा होती है, परन्तु जब दुष्ट प्रबल होते हैं तो लोग अपने आपको छिपा लेते है।
13जो अपने अपराध छिपाता है वह सफल नही होगा, परन्तु जो उन्हें मानकर छोड़ देता है उस पर दया की जाएगी।
14क्या ही धन्य है वह जो सदा प्रभु का भय मानता है, परन्तु जो अपने हृदय को कठोर करता है वह विपत्ति में पड़ेगा।
15निर्धन लोगों के ऊपर दुष्ट शासक दहाड़ते हुए सिंह और झपटते हुए रीछ के समान होता है।
16घोर अत्याचारी शासक में समझ की घटी होती है, परन्तु जो अन्याय के लाभ से घृणा करता है वह दीर्घायु पाएगा।
17जिसका सिर हत्या के दोष से दबा हो, वह मृत्यु तक भागता फिरेगा; कोई उसकी सहायता न करे।
18जिसकी चाल निर्दोष हो वह छुटकारा पाएगा, परन्तु कुटिल मनुष्य अचानक गिरेगा।
19जो अपनी भूमि को जोतता है उसके पास बहुतायत से भोजन होगा, परन्तु जो व्यर्थ की बातों में समय बिताता है वह अत्यधिक दरिद्र होगा।
20विश्वसनीय मनुष्य आशीषों की बहुतायत पाएगा, परन्तु जो शीघ्र ही धनी बनना चाहता है, वह दण्ड पाए बिना न रहेगा।
21पक्षपात करना अच्छा नहीं, क्योंकि मनुष्य तो रोटी के एक टुकड़े के लिए भी अपराध करता है।
22लोभी मनुष्य धन के पीछे भागता है और यह नहीं जानता कि उस पर घटी आ पड़ेगी।
23जो किसी मनुष्य को डांटता है, वह अंत में चापलूसी करने वाले की अपेक्षा अधिक प्रशंसा पाएगा।
24जो अपने पिता या अपनी माता को लूट कर कहता है, “यह अपराध नहीं,” वह नाश करने वाले मनुष्य का साथी है।
25लालची मनुष्य झगड़ा मचाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है, वह हृष्ट-पुष्ट होगा।
26जो अपने ऊपर भरोसा रखता है वह मूर्ख है, परन्तु जो बुद्धिमानी से चलता है वह छुटकारा पाएगा।
27जो निर्धन को देता है उसे कभी घटी नहीं होगी, परन्तु जो दृष्टि फेर लेता है वह शाप पर शाप पाता है।
28जब दुष्ट प्रबल होते हैं तो लोग छिप जाते हैं, परन्तु जब वे नष्ट होते हैं तो धर्मियों की उन्नति होती है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)