नीतिवचन 28:13
जो अपने अपराध छिपाता है वह सफल नही होगा, परन्तु जो उन्हें मानकर छोड़ देता है उस पर दया की जाएगी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: नीतिवचन 28
10जो खरे लोगों को भटका कर बुरी राह में ले चलता है, वह स्वयं गड्हे में गिरेगा, परन्तु निर्दोष लोग मीरास में अच्छी वस्तुओं को पाएंगे।
11धनी मनुष्य अपनी दृष्टि में बुद्धिमान होता है, परन्तु समझदार निर्धन तो उसे परख लेता है।
12जब धर्मी विजयी होते हैं, तो बड़ी महिमा होती है, परन्तु जब दुष्ट प्रबल होते हैं तो लोग अपने आपको छिपा लेते है।
13जो अपने अपराध छिपाता है वह सफल नही होगा, परन्तु जो उन्हें मानकर छोड़ देता है उस पर दया की जाएगी।
14क्या ही धन्य है वह जो सदा प्रभु का भय मानता है, परन्तु जो अपने हृदय को कठोर करता है वह विपत्ति में पड़ेगा।
15निर्धन लोगों के ऊपर दुष्ट शासक दहाड़ते हुए सिंह और झपटते हुए रीछ के समान होता है।
16घोर अत्याचारी शासक में समझ की घटी होती है, परन्तु जो अन्याय के लाभ से घृणा करता है वह दीर्घायु पाएगा।
संबंधित पद
- 1 यूहन्ना 1:8–10
यदि हम कहें कि हम में पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं, और हम में सत्य नहीं है।
- अय्यूब 31:33
क्या बड़ी भीड़ के डर के मारे मैंने अपने अधर्म को अपने मन में छिपाकर,आदम के सामन अपने अपराधों को ढांपा? या कुलों की घृणा से भयभीत होकर,मैं चुप्पी साधे रहा और द्वार से बाहर नहीं निकला?
- लूका 15:18–24
मैं उठकर अपने पिता के पास जाऊंगा और उससे कहूँगा, “हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है।
- यिर्मयाह 3:12–13
उत्तर दिशा की ओर जाकर इन शब्दों का प्रचार कर और कह, ‘हे विश्वासघातिनी इस्राएल, लौट आ।’ यहोवा की वाणी है, ‘मैं तुझ पर क्रोध की दृष्टि नहीं करूंगा, क्योंकि मैं अनुग्रहकारी हू। यहोवा की वाणी है, ‘मैं तुझ पर सदा सर्वदा क्रोधित नहीं रहूंगा।
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