नीतिवचन 30:5
परमेश्वर का एक-एक वचन ताया हुआ हैः जो परमेश्वर की शरण लेते हैं उनके लिए वह ढाल है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: नीतिवचन 30
2निश्चय ही मैं हर एक मनुष्य से अधिक बुद्धिहीन हूँ और मुझमें मनुष्य की सी समझ नही।
3न तो मैंने बुद्धि प्राप्त की है और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है।
4कौन स्वर्ग में चढ़कर पुनः उतर आया है? किसने हवा को अपनी मुट्ठी में एकत्र कर रखा है? किसने समुद्र को अपने वस्त्र में बांध लिया है? किसने पृथ्वी के सिवानों को निर्धारित किया है- उसका अथवा उसके पुत्र का नाम क्या है? तू तो निश्चय जानता होगा!
5परमेश्वर का एक-एक वचन ताया हुआ हैः जो परमेश्वर की शरण लेते हैं उनके लिए वह ढाल है।
6तू उसके वचन में कुछ न जोड़ ऐसा न हो कि वह तुझे डाँटे और तू झूठा ठहरे।
7मैंने तुझसे दो बातों की याचना की है- मेरे मरने से पहले मुझे देने से मुंह न मोड़ः
8धोखा और झूठ दोनों को मुझसे दूर रख, मुझे न तो धन और न निर्धनता दे। प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर
संबंधित पद
- याकूब 3:17
पर जो ज्ञान ऊपर से आता है, वह पहिले तो पवित्र होता है, फिर मिलनसार, कोमल, विचारशील, करुणामय और अच्छे फलों से लदा हुआ, स्थिर और कपट-रहित होता है।
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