नीतिवचन 31:30
आकर्षण तो झूठा और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसी की प्रशंसा होगी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: नीतिवचन 31
27वह अपनी गृहस्थी के सब मामलों पर ध्यान रखती, और परिश्रम किये बिना रोटी नहीं खाती।
28उसके बच्चे उठकर उसे धन्य कहते है। उसका पति भी यह कह कर उसकी प्रशंसा करता हैः
29“बहुत-सी स्त्रियों ने अच्छे-अच्छे कार्य तो किये हैं, परन्तु तू उनमें से श्रेष्ठ है।”
30आकर्षण तो झूठा और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसी की प्रशंसा होगी।
31उसके हाथों का फल उसे दो, और नगर-द्वारों में उसके कार्यों से उसकी प्रशंसा हो।
संबंधित पद
- नीतिवचन 1:7
यहोवा का भय मानना बुद्धि का प्रारम्भ है, मूर्ख ही बुद्धि तथा शिक्षा को तुच्छ समझते है।
- 1 पतरस 3:4–5
वरन् यह तुम्हारा आंतरिक व्यक्तित्व हो, जो नम्र और शान्त मन वाले अविनाशी आभूजणों से सुसज्जित हो, जिसका परमेश्वर की दृष्टि में बड़ा मूल्य है।
- नीतिवचन 11:22
जिस प्रकार सूअर के थूथन में सोने की नथ, उसी प्रकार वह सुन्दर स्त्री है जो विवेकहीन है।
- नीतिवचन 8:13
यहोवा का भय मानना, बुराई से बैर रखना है। घमंड, अहंकार तथा बुरी बात और कुटिल बातों से मुझे घृणा है।
- 1 पतरस 1:24
क्योंकि, “सब प्राणी घास के सदृश हैं, और उनकी सारी शोभा घास के फूल के सदृश है। घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है,
- 1 कुरिन्थियों 4:5
इसलिए, समय से पहिले किसी बात का न्याय न किया करो, वरन् जब तक प्रभु न आए तब तक ठहरे रहो, क्योंकि वह उन बातों को जो अन्धकार में छिपी हैं प्रकाश में लाएगा, और मनुष्यों की मनोभावनाओं को प्रकट करेगा। तब प्रत्येक मनुष्य की प्रशंसा परमेश्वर की ओर से होगी।
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