नीतिवचन 9:10
यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र को जानना ही समझ है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: नीतिवचन 9
7जो कोई उपहास करने वाले को शिक्षा देता है, वह अपमानित होता है, और जो दुष्ट जन को डाँटता है, वह कलंकित होता है।
8उपहास करने वाले को मत डाँट, ऐसा न हो कि वह तुझसे बैर करने लगे; बुद्धिमान को डाँट तो वह तुझसे प्रेम रखेगा।
9बुद्धिमान को शिक्षा दे और वह अधिक बुद्धिमान होगा, धर्मी को सिखा तो वह अपनी विघा बढ़ाएगा।
10यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र को जानना ही समझ है।
11क्योंकि मेरे द्वारा तेरी आयु बढ़ेगी, वरन् तेरे जीवन के वर्ष अधिक होंगे।
12यदि तू बुद्धिमान हो, तो बुद्धि ही तेरा प्रतिफल होगी, और यदि तू उपहास करे, तो अकेला तू ही भोगेगा।
13मूर्खता, हल्ला मचाने वाली स्त्री है, वह तो भोली है और कुछ नहीं जानती।
संबंधित पद
- अय्यूब 28:28
मनुष्य से कहा, ‘देख, प्रभु का भय मानना यही बुद्धि है; और बुराई से दूर रहना यही समझ है’।”
- नीतिवचन 1:7
यहोवा का भय मानना बुद्धि का प्रारम्भ है, मूर्ख ही बुद्धि तथा शिक्षा को तुच्छ समझते है।
- सभोपदेशक 12:13
जब सब कुछ सुन लिया गया, निष्कर्ष यह हैः परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर, क्योंकि प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य यही है।
- नीतिवचन 2:5
तो तू यहोवा के भय को पहचान सकेगा, और तुझे परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त होगा।
- 1 यूहन्ना 5:20
हम जानते हैं कि परमेश्वर का पुत्र आ चुका है, और उसने हमें समझ दी है, कि हम उसे जो सत्य है जान सकें, और हम उसमें हैं जो सत्य है, अर्थात् उसके पुत्र यीशु मसीह मे। यही सच्चा परमेश्वर और अनन्त जीवन है।
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