भजन संहिता 1:2
परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन मनन करता रहता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: भजन संहिता 1
1क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की सम्मति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करने वालों की बैठक में बैठता है।
2परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन मनन करता रहता है।
3वह उस वृक्ष के समान है जो जल-धाराओं के किनारे लगाया गया है, और अपनी ट्टतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं: इसलिए जो कुछ वह मनुष्य करता है वह उसमें सफल होता है।
4दुष्ट ऐसे नहीं होते, वे भूसी के समान होते हैं जिसे पवन उड़ा ले जाता है।
5इसलिए दुष्ट, न्याय में स्थिर न रह सकेंगे, न पापी, धर्मियों की सभा मे।
संबंधित पद
- यहोशू 1:8
व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे मुंह से कभी दूर न हो, परन्तु इस पर दिन-रात ध्यान करते रहना जिससे तू उसमें लिखी हुई बातों के अनुसार आचरण करने के लिए सावधान रह सके। तब तू अपने मार्ग को सफल बना सकेगा और सफलता प्राप्त करेगा।
- रोमियों 7:22
क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व में आनन्दपूर्वक परमेश्वर की व्यवस्था से सहमत रहता हूं,
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