पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 1 / 150
भजन संहिता 1
1क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की सम्मति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करने वालों की बैठक में बैठता है।
2परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन मनन करता रहता है।
3वह उस वृक्ष के समान है जो जल-धाराओं के किनारे लगाया गया है, और अपनी ट्टतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं: इसलिए जो कुछ वह मनुष्य करता है वह उसमें सफल होता है।
4दुष्ट ऐसे नहीं होते, वे भूसी के समान होते हैं जिसे पवन उड़ा ले जाता है।
5इसलिए दुष्ट, न्याय में स्थिर न रह सकेंगे, न पापी, धर्मियों की सभा मे।
6क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नष्ट हो जाएगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)