पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 2 / 150
भजन संहिता 2
1जाति-जाति के लोग क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, और देश-देश के लोग व्यर्थ बात क्यों गढ़ते हैं?
2यहोवा और उसके अभिषिक्त के विरुद्ध पृथ्वी के राजा उठ खड़े होकर, और शासक एक साथ मिलकर यह सम्मति करते हैं:
3“आओ, हम उनकी जंजीरों को तोड़ डालें और उनके बन्धनों को अपने ऊपर से उतार फेंके।”
4वह जो स्वर्ग में विराजमान है, हँसता है, प्रभु उनको ठट्ठों में उड़ाता है।
5तब वह अपने क्रोध में उनसे बातें करता, और अपने प्रकोप में उन्हें भयभीत कर देता हैः
6“मैं तो अपने राजा को अपने पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पर बैठा चुका हू।”
7“निश्चय ही मैं यहोवा के वचन का प्रचार करूंगाः उसने मुझसे कहा, ‘तू मेरा पुत्र है, आज ही मैंने तुझे उत्पन्न किया है।
8मुझ से मांग तो निश्चय ही मैं जाति-जाति को तेरे उत्तराधिकार में, और पृथ्वी के छोर तेरी निज भूमि होने के लिए दे दूंगा।
9तू लौह-दण्ड से उनके टुकड़े-टुकड़े कर देगा, और कुम्हार के बर्तन के समान तू उन्हें चकनाचूर कर डालेगा’।”
10इसलिए, अब हे राजाओ, समझदारी दिखाओ, और पृथ्वी के न्यायियों, चेतावनी पर ध्यान दो।
11भय सहित यहोवा की उपासना करो, और थरथराते हुए मग्न हो।
12पुत्र का सम्मान करो, ऐसा न हो कि वह क्रोधित हो जाए और तुम मार्ग में ही नष्ट हो जाओ, क्योंकि उसका प्रकोप शीघ्र भड़क सकता है। क्या ही धन्य हैं वे सब जो उसकी शरण लेते है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)