भजन संहिता 1:3
वह उस वृक्ष के समान है जो जल-धाराओं के किनारे लगाया गया है, और अपनी ट्टतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं: इसलिए जो कुछ वह मनुष्य करता है वह उसमें सफल होता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: भजन संहिता 1
1क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की सम्मति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करने वालों की बैठक में बैठता है।
2परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन मनन करता रहता है।
3वह उस वृक्ष के समान है जो जल-धाराओं के किनारे लगाया गया है, और अपनी ट्टतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं: इसलिए जो कुछ वह मनुष्य करता है वह उसमें सफल होता है।
4दुष्ट ऐसे नहीं होते, वे भूसी के समान होते हैं जिसे पवन उड़ा ले जाता है।
5इसलिए दुष्ट, न्याय में स्थिर न रह सकेंगे, न पापी, धर्मियों की सभा मे।
6क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नष्ट हो जाएगा।
संबंधित पद
- यिर्मयाह 17:8
क्योंकि वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के किनारे लगाया गया हो और जिसकी जड़ें जल तक फैली हों; जब गर्मी पड़ेगी तो उसे कुछ भय न होगा, परन्तु उसके पत्ते हरे-भरे रहेंगे; और सूखे के वर्ष में भी उसे कुछ चिन्ता न होगी और वह निरन्तर फलता रहेगा।
- यहेजकेल 47:12
और नदी के तट पर दोनों ओर खाने के लिए सब प्रकार के वृक्ष उगेंगे। उनके पत्ते मुर्झाएंगे नहीं और उनके फल समाप्त नहीं होंगे। वे हर महीने फलते रहेंगे क्योंकि उनको सींचने वाला पानी पवित्रस्थान से बहता है; उनके फल भोजन के लिए और पत्ते चंगाई के लिए काम आएंगे।”
- यूहन्ना 15:6
यदि कोई मुझमें बना न रहे, तो वह डाली की भाँति फेंक दिया जाता है और सूख जाता है, और लोग उन्हें इकट्ठा कर आग में झोंक देते हैं और वे जल जाती है।
- यहेजकेल 19:10
“तेरी माता जल के किनारे लगाई गई तेरी बारी की एक दाखलता के समान थी जो जल की भरपूरी के कारण फलों और डालियों से लदी हुई थी।
- उत्पत्ति 39:23
मुख्य दारोगा तो यूसुफ के अधीन किए गए किसी भी काम को नहीं देखता था, क्योंकि यहोवा यूसुफ के संग था। और जो कुछ भी वह करता था, यहोवा उसमें उसे सफलता देता था।
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