पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 109 / 150
भजन संहिता 109
1हे परमेश्वर तू, जिसकी मैं स्तुति करता हूं, चुप न रह!
2क्योंकि दुष्टों और कपटियों ने मेरे विरुद्ध मुंह खोला है, झूठ बोलने वाली जीभ से वे मेरे विरुद्ध बोलते है।
3उन्होंने मुझे घृणा के वचनों से घेर लिया है और अकारण मुझसे झगड़ा किया है।
4मेरे प्रेम के बदले में वे मुझ पर दोष लगाते हैं, परन्तु मैं तो प्रार्थना में लीन रहता हूँ।
5इस प्रकार उन्होंने भलाई के बदले मुझसे बुराई, और प्रेम के बदले घृणा की है।
6तू उसके ऊपर किसी दुष्ट मनुष्य को नियुक्त कर; और कोई दोष लगाने वाला उसके दाहिने हाथ खड़ा हो।
7जब उसका न्याय हो तो वह दोषी ठहरे, और उसकी प्रार्थना पाप गिनी जाए।
8उसके दिन थोड़े हों; उसका पद कोई दूसरा छीन ले।
9उसके बच्चे पितृहीन हो जाएं, और उसकी पत्नी विधवा हो जाए।
10उसके बच्चे मारे-मारे फिरें और भीख मांगे; उन्हें अपने उजड़े घरों से दूर जाकर टुकड़े माँगने पड़े।
11महाजन छल से उसका सब कुछ ले ले, और परदेशी उसके परिश्रम के फल को लूट ले।
12कोई उसके प्रति करुणा दिखाने वाला न रहे, न ही कोई उसके पितृहीन बच्चों पर अनुग्रहकारी हो।
13उसका वंश नष्ट किया जाए, भावी पीढ़ी में से उनका नाम मिटा दिया जाए।
14उसके पूर्वजों का अधर्म यहोवा को स्मरण रहे, और उसकी मां का पाप मिटाया न जाए।
15वे निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहें, कि वह पृथ्वी पर से उनकी स्मृति तक मिटा डाले;
16क्योंकि उसने करुणा दिखाने को स्मरण न किया, परन्तु दीन और दरिद्र मनुष्य को सताया, और खेदित मन वालों को मार डालने के लिए उनके पीछे पड़ा रहता था।
17उसने शाप देने से प्रीति रखी- वही उस पर आ पड़ा; वह आशीर्वाद देेने से प्रसन्न नहीं होता था, इसलिए आशीर्वाद भी उससे दूर रहा।
18परन्तु उसने शाप को अपने वस्त्रों की भांति पहन लिया; वह उसके पेट में पानी के समान और उसकी हड्डियों में तेल के समान समा गया।
19वह उसके लिए ओढ़ने का वस्त्र ठहरे, और कटिबन्ध की तरह उसकी कमर में नित्य कसा रहे।
20यहोवा की ओर से मेरे विरोधियों को, और उनको जो मेरे विरुद्ध बोलते हैं, यही बदला मिले।
21परन्तु हे यहोवा प्रभु, तू अपने नाम के निमित्त मुझसे दयापूर्वक बर्ताव कर; क्योंकि तेरी करुणा उत्तम है, मुझे छुड़ा ले;
22क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं, और मेरे भीतर मेरा हृदय घायल है।
23मैं ढलती हुई छाया के समान मिटता जा रहा हूं; मैं टिड्डी के समान उड़ा दिया गया हू।
24उपवास करते-करते मेरे घुटने निर्बल हो गए; चर्बी के बिना मेरा शरीर सूख गया।
25मैं उनके लिए निन्दा का पात्र बन गया हूं; वे मुझे देख कर सिर हिलाते है।
26हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी सहायता कर; अपनी करुणा के अनुसार मुझे बचा ले।
27और वे जान लें कि इसमें तेरा ही हाथ है; हे यहोवा, तूने ही यह किया है।
28वे शाप देते रहें, परन्तु तू आशीष दे; वे जब उठेंगे तो शर्मिन्दा हो जाएंगे, परन्तु तेरा दास आनन्दित होगा।
29मेरे विरोधियों को अनादर का वस्त्र पहनाया जाए, वे अपनी लज्जा की चादर से ढंक जाए।
30मैं अपने मुंह से यहोवा का बहुत धन्यवाद करूंगा; और बहुतों के मध्य, मैं उसकी स्तुति करूंगा।
31क्योंकि वह दरिद्र के दाहिनी ओर खड़ा होगा, कि उसे प्राण-दण्ड दिलाने वालों से बचाए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)