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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 111 / 150

भजन संहिता 111

1याह की स्तुति करो। मैं सीधे लोगों की सभा में और मंडली में, अपने सम्पूर्ण मन से यहोवा को धन्यवाद दूंगा।

2यहोवा के कार्य महान् हैं, वे सब जो उनसे प्रसन्न रहते हैं, उन पर ध्यान लगाते है।

3उसके कार्य वैभवशाली और प्रतापी हैं, और उसकी धार्मिकता सदा तक बनी रहती है।

4उसने अपने अद्भुत कार्यों का स्मरण कराया है, यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु है।

5जो उसका भय मानते हैं उसने उनको भोजन दिया; वह अपनी वाचा को सर्वदा तक स्मरण रखेगा।

6उसने जाति-जाति का उत्तराधिकार अपनी प्रजा को देकर, अपने कार्यों का सामर्थ्य उन पर प्रकट किया है।

7उसके हाथ के कार्य सत्य और न्यायपूर्ण हैं, उसके सब उपदेश विश्वसनीय है।

8वे सदा-सर्वदा तक अटल हैं, वे सच्चाई और सीधाई से किए गए है।

9मूल्य देकर उसने अपनी प्रजा को छुड़ाया है, उसने अपनी वाचा को सदा के लिए ठहराया है; उसका नाम पवित्र और भययोग्य है।

10यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है; उन सब की समझ उत्तम होती है जो उसकी आज्ञा-पालन करते है। उसकी स्तुति सदा बनी रहती है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)