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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 12 / 150

भजन संहिता 12

1हे यहोवा, सहायता कर, क्याेंकि एक भी भक्त न रहा, और मानवजाति में विश्वसनीय व्यक्ति नहीं रहे।

2वे एक दूसरे से झूठी बातें कहते हैं, चापलूसी भरे होंठों तथा दोरंगे मन से वे बोलते है।

3यहोवा चापलूस होंठों और ऐसी जीभ को जिससे बड़े-बड़े बोल निकलते हैं काट डाले,

4जिन्होंने कहा है, “हम अपनी जीभ से ही विजयी होंगे, हमारे होंठ तो हमारे ही हैं, भला कौन है हमारा प्रभु?”

5पीड़ितों के सर्वनाश किए जाने और दरिद्रों के कराहने के कारण, “अब मैं उठूँगा,” यहोवा कहता है, “और उसे उसी सुरक्षा में रखूंगा जिसकी उसे तीव्र इच्छा है।”

6यहोवा के वचन तो पवित्र वचन हैं, वे ऐसी चांदी के समान हैं जो भट्ठी में मिट्टी पर ताई जाकर सात बार शुद्ध की गई हो।

7हे यहोवा, तू ही उनकी रक्षा करेगा, तू ही इस पीढ़ी के लोगों से उसको सर्वदा के लिए सुरक्षित रखेगा।

8जब मनुष्यों में नीचता का सम्मान होता है। तो दुष्ट चारों ओर अकड़ते-फिरते है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)