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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 14 / 150

भजन संहिता 14

1मूर्ख ने अपने मन में कहा है, “परमेश्वर है ही नही।” वे भ्रष्ट हैं, उन्होंने घृणित कार्य किए हैं, ऐसा कोई नहीं जो भलाई करता हो।

2यहोवा ने स्वर्ग से मनुष्य की सन्तान पर दृष्टि की है, कि देखे कि कोई समझदार, कोई परमेश्वर का खोजी है या नही।

3वे सबके सब भटक गए, वे सब ही भ्रष्ट हो गए हैं; कोई भी नहीं जो भलाई करता हो, एक भी नही।

4दुष्टता के कार्य करने वाले क्या सब नासमझ ही हैं, जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, और यहोवा का नाम भी नहीं लेते?

5देखो, उन पर अत्यन्त भय छा गया, क्योंकि परमेश्वर तो धर्मियों के समूह के साथ है।

6तुम तो दीन की युक्ति को ठट्ठों में उड़ाते हो, परन्तु यहोवा उसका शरणस्थान है।

7भला होता कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से प्रकट होता! जब यहोवा अपने लोेगों को दासत्व से छुड़ा लाएगा, तब याकूब आनन्द मनाएगा और इस्राएल मग्न होगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)