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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 17 / 150

भजन संहिता 17

1हे यहोवा, मेरा उचित पक्ष सुन, मेरी पुकार पर ध्यान दे, मेरी प्रार्थना पर कान लगा जो कपटपूर्ण होंठों से नहीं निकली।

2मेरा न्याय तू ही चुका, तेरी आंखें निष्पक्ष होकर देखे।

3तूने मेरे हृदय को परखा है, तूने रात को मुझे जांचा है, तूने मुझे परखा है पर कुछ भी कुटिलता न पाई; मैंने तो ठान लिया है कि मेरे मुंह से अपराध नहीं होगा।

4मनुष्य के कामों में-तेरे होंठों के वचन के द्वारा मैंने अपने आपको क्रूरों की चाल से बचाए रखा है।

5मेरे कदम तेरे पथों पर दृढ़ता से बढ़ते रहे, मेरे पैर फिसले नही।

6हे परमेश्वर, मैंने तुझे पुकारा है, क्योंकि तू मुझे उत्तर देगा। अपना कान मेरी ओर लगाकर मेरी विनती सुन।

7हे उनके उद्धारकर्ता जो अपने विरोधियों से बचने के लिए तेरे दाहिने हाथ शरण लेते हैं, तू अपनी करुणा अद्भुत रीति से दिखा।

8अपनी आंख की पुतली के समान मेरी रक्षा कर; अपने पंखों की आड़ में मुझे छिपा ले,

9अर्थात् उन दुष्टों से जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, उन प्राणघातक शत्रुओं से जो मुझे घेरे हुए है।

10उनके हृदय पर चर्बी चढ़ गई है, वे अपने मुंह से घमंड की बातें बोलते हैं

11उन्होंने पग-पग पर हमें घेर लिया है, हमें मिट्टी में मिला देने के लिए वे घात लगाए हुए है।

12वह ऐसे सिंह के समान है जो फाड़ खाने को व्यग्र हो, अर्थात् जवान सिंह के समान जो घात लगाकर दुबका बैठा हो।

13उठ, हे यहोवा, उसका सामना कर, उसका दमन कर दे; अपनी तलवार से मेरे प्राण को दुष्ट से बचा ले,

14हां, मनुष्यों से अपने हाथ के द्वारा, हे यहोवा, अर्थात् संसार के मनुष्यों से जिनका भाग इसी जीवन में है, जिनका पेट तू अपने भंडार से भरता है; वे तो बाल-बच्चों से सन्तुष्ट रहते हैं और बड़ी सम्पत्ति अपने बच्चों के लिए छोड़ जाते है।

15परन्तु मैं तो धार्मिकता के कारण तेरे मुख का दर्शन करूंगा; जब मैं जाग उठूँगा तो तेरे स्वरूप को देख कर तृप्त हो जाऊंगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)