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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 32 / 150

भजन संहिता 32

1दाऊद का भजन। मश्कील। क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, जिसका पाप ढांपा गया हो!

2क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का लेखा यहोवा न ले, और जिसकी आत्मा में कोई कपट न हो।

3जब मैं अपने पाप के प्रति चुप रहा तब दिन-भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियां पिघल गईं,

4क्योंकि तेरा हाथ दिन-रात मुझ पर भारी रहा। मेरी जीवन-शक्ति मानो ग्रीष्मकाल के पाप से क्षीण हो गई। सेला।

5मैंने तेरे सामने अपना पाप मान लिया और अपना अधर्म न छिपाया। मैंने कहा, “मैं अपने अपराध यहोवा के सामने मान लूँगा,” तब तूने मेरे पाप के दोष को क्षमा कर दिया।

6इसलिए तेरा प्रत्येक भक्त ऐसे समय में तुझसे प्रार्थना करे जब तू मिल सकता हैः निश्चय ही जल की बड़ी बाढ़ भी उस तक न पहुंचेगी।

7तू मेरे छिपने का स्थान है, तू मुझे संकट से बचाए रखता है; तू मुझे छुटकारे के गीतों से घेरे रहता है। सेला।

8मैं तुझे बुद्धि दूँगा और जिस मार्ग पर तुझे चलना है उसमें तेरी अगुवाई करूंगा, मैं अपनी दृष्टि तुझ पर लगाए रखकर तुझे सम्मति दूंगा।

9घोड़े और खच्चर के समान न बन जिनमें समझ नहीं होती- उन्हें काबू करने के लिए उनके साज में लगाम और रास होती है। अन्यथा वे तेरे वश में नहीं आने के

10दुष्ट को तो बहुत दुख होते हैं, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

11हे धर्मियों, यहोवा में आनन्दित और मग्न रहो! और हे सब सीधे मन वालो, आनन्द से जय-जयकार करो!

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)