पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 41 / 150
भजन संहिता 41
1क्या ही धन्य है वह जो कंगाल की सुधि लेता हैः संकट के दिन यहोवा उसे छुड़ाएगा।
2यहोवा उसकी रक्षा करके उसे जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर धन्य कहलाएगा। तू उसे शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
3रोग-शय्या पर यहोवा उसे संभालेगा- तू रोग के बिछौने पर से उसे उठा खड़ा करेगा।
4मैंने तो कहा, “हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर; मुझे चंगा कर, क्योंकि मैंने तेरे विरुद्ध पाप किया है।”
5मेरे शत्रु यह कहकर मेरी बुराई करते हैं: “वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा?”
6जो मुझे देखने आता है, वह झूठी बाते बकता है; उसका हृदय दुष्टता की बातें बटोरता है, और बाहर जाकर वह उन्हीं की चर्चा करता है।
7मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरुद्ध कानाफूसी करते है; वे मेरे विरुद्ध यह कहकर हानि की युक्ति करते हैं:
8“इसे तो कोई बुरा रोग लग गया हैः अब जो यह पड़ा हुआ है फिर कभी उठने का नही।”
9मेरे परम मित्र ने भी, जिस पर मैंने भरोसा रखा था, जो मेरी रोटी खाता था- उसने भी मेरे विरुद्ध लात उठाई है।
10परन्तु हे यहोवा, तू मुझ पर अनुग्रह करके मुझे उठा खड़ा कर, कि मैं उनका बदला दू।
11मेरा शत्रु मुझ पर विजयी होकर हर्षनाद नहीं कर पाता, इससे मैं जानता हूं कि तू मुझसे प्रसन्न है।
12मुझे तो तू ही मेरी खराई में सम्भाले रहता है, और अपने सम्मुख सर्वदा के लिए स्थिर करता है।
13इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य हो! आमीन, फिर आमीन।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)