पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 42 / 150
भजन संहिता 42
1जैसे हरिणी नदी के जल के लिए हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिए हांफता हू।
2मैं परमेश्वर के लिए, हां, जीवित परमेश्वर के लिए प्यासा हू। मैं कब जाकर परमेश्वर के सम्मुख खड़ा हो पाऊँगा?
3मेरे आंसू रात-दिन मेरा आहार रहे हैं जबकि लोग दिन भर मुझसे कहते रहते हैं, “तेरा परमेश्वर कहां है?”
4इन बातों को स्मरण करके मेरा मन भीतर ही भीतर भर जाता है कि मैं कैसे भीड़ के मध्य जलूस में आगे-आगे चलकर, धन्यवाद व जय-जयकार के स्वरों और उत्सव मनाती हुई भीड़ के साथ यहोवा के भवन में जाया करता था।
5हे मेरे प्राण, तू निराश क्यों है? और भीतर ही भीतर तू व्याकुल क्यों? परमेश्वर पर आस लगाए रह- क्योंकि उसकी उपस्थिति रूपी सहायता के कारण मैं पुनः उसकी स्तुति करूंगा जो मेरा उद्धारकर्ता, मेरा परमेश्वर है।
6‘हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण भीतर ही भीतर व्याकुल है, इसलिए यर्दन के प्रदेश से, हेर्मोन की चोटियाें और मिसार की पहाड़ी पर से, मैं तुझे स्मरण किया करता हू।
7तेरे जल-प्रपातों की गूंज से सागर, सागर को पुकारता है। तेरी सारी तरंगों और लहरों ने मुझे ढांप लिया है।
8दिन को तो यहोवा अपनी करुणा दिखाएगा, और रात को मैं उसका गीत गाऊँगा, अपने जीवन के परमेश्वर से प्रार्थना करूंगा।
9मैं परमेश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूँगाः “तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के कारण क्यों विलाप करता-फिरता हूं?”
10मेरे शत्रु मेरी निन्दा करते हैं, मानो मेरी हड्डियां चूर-चूर कर देते है। वे दिन भर मुझसे कहते रहते हैं, “कहां है तेरा परमेश्वर?”
11हे मेरे प्राण, तू निराश क्यों है? और भीतर ही भीतर तू व्याकुल क्यों? परमेश्वर पर आस लगाए रह- क्योंकि उसकी उपस्थिति रूपी सहायता के कारण मैं पुनः उसकी स्तुति करूंगा। जो मेरा उद्धारकर्ता, मेरा परमेश्वर है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)