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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 44 / 150

भजन संहिता 44

1हे परमेश्वर, हमने अपने कानों से सुना, हमारे बाप दादाओं ने हमें यह बताया कि तूने उनके दिनों में अर्थात् प्राचीनकाल में क्या क्या काम किए है।

2तूने अपने ही हाथ से विभिन्न जातियों को खदेड़ा, और इनको बसाया; तूने देश-देश के लोगों का दमन किया, और इनका विस्तार किया।

3क्योंकि न तो उन्होंने अपनी तलवार के बल से इस देश पर अधिकार किया, और न ही उनके बाहुबल ने उन्हें बचाया; परन्तु यह तो तेरे दाहिने हाथ, और तेरी भुजा, और तेरे मुख के प्रकाश से हुआ, क्योंकि तू उनको चाहता था।

4हे परमेश्वर, तू ही मेरा राजा हैः याकूब के हित में विजय की आज्ञा दे।

5तेरे ही सहारे से हम अपने शत्रुओं को पीछे खदेड़ देंगे, तेरे नाम से हम अपने विरोध में उठने वालों को कुचल डालेंगे।

6न तो मैं अपने धनुष पर भरोसा रखूंगा, न मेरी तलवार मेरी रक्षा करेगी।

7परन्तु तू ही ने हमारे शत्रुओं से हमें बचाया है, और हमारे बैरियों को लज्जित किया है।

8हम दिन-भर अपने परमेश्वर पर गर्व करते रहे हैं, और तेरे नाम का धन्यवाद सदा-सर्वदा करते रहेंगे। सेला।

9पर अब तूने हमें त्याग कर अपमानित किया है, और हमारी सेनाओं के साथ आगे नहीं जाता।

10तू हमें शत्रुओं को पीठ दिखाने के लिए विवश कर देता है, और हमारे बैरियों ने मनमानी हमारी लूट-मार की है।

11तूने हमें कसाई की भेड़ों के समान कर दिया है, और हमें जाति-जाति में तितर-बितर किया है,

12तूने अपनी प्रजा को यूं ही बेच दिया है, और उनका कुछ भी दाम नहीं लगाया।

13तूने हमारे पड़ोसियों के लिए हमें निन्दा का, और हमारे चारों ओर रहने वाले के लिए हंसी और ठट्ठे का कारण बनाया है।

14तू हमें सब जातियों के मध्य उपमा ठहराता है, और देश-देश के लोग सिर हिला-हिलाकर हम पर हँसते है।

15दिनभर मेरा अपमान मेरे सामने रहता है। निन्दा और ठट्ठा करने वाले की आवाज के कारण, शत्रु और बदला लेने वाले की उपस्थिति के कारण लज्जा ने मेरे मुख को ढांप लिया है।

16दिनभर मेरा अपमान मेरे सामने रहता है। निन्दा और ठट्ठा करने वाले की आवाज के कारण, शत्रु और बदला लेने वाले की उपस्थिति के कारण लज्जा ने मेरे मुख को ढांप लिया है।

17यह सब हम पर बीता, फिर भी हम तुझे नहीं भूले, न हमने तेरी वाचा के प्रति विश्वासघात किया है।

18हमारे मन न बहके, न हमारे कदम तेरे मार्ग से भटके,

19फिर भी तूने हमें कुचल कर गीदड़ों का स्थान बना दिया, और हमें मृत्यु की छाया से ढांप दिया है।

20यदि हम अपने परमेश्वर का नाम भूल जाते, या अपने हाथ किसी पराए देवता की ओर फैलाते,

21तो क्या परमेश्वर इसे जान नहीं जाता? क्योंकि वह तो हृदय की गुप्त बातों को जानता है।

22परन्तु हम तो तेरे लिए दिन भर घात किए जाते हैं, हम वध होने वाली भेड़ों के समान समझे जाते है।

23हे प्रभु, जाग! तू क्यों सोता है? उठ! हमें सर्वदा के लिए त्याग न दे।

24तू क्यों अपना मुंह छिपा लेता है और हमारे संकट और सताए जाने को भूल जाता है?

25हमारा प्राण धूल में मिल गया है, हमारी देह धरती से लग गई है।

26उठ! हमारी सहायता कर,और अपनी करुणा के कारण हमें छुड़ा ले।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)