पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 48 / 150
भजन संहिता 48
1हमारे परमेश्वर के नगर में, अपने पवित्र पर्वत पर, यहोवा महान् और अति स्तुति के योग्य है।
2ऊंचाई में सुन्दर तथा समस्त पृथ्वी का आनन्द सुदूर उत्तर में स्थित सिय्योन पर्वत है, जो महाराजाधिराज का नगर है।
3परमेश्वर वहां के राजमहलों में है, उसने अपने आप को दृढ़ गढ़ सिद्ध किया है।
4क्याेंकि देखो, राजा इकट्ठे हुए, वे एक साथ निकले।
5इसे देखते ही वे विस्मित हुए, वे घबरा कर भाग खड़े हुए।
6कँपकँपी ने, हां, पीड़ा ने, जच्चा की-सी पीड़ा ने उन्हें धर दबोचा।
7तू पूर्वी वायु से तर्शीश के जहाजों को तोड़ डालता है।
8जैसा सुना था, वैसा ही हमने सेनाओं के यहोवा के नगर में, अपने परमेश्वर के नगर में, होते देखाः परमेश्वर उसको सदा तक सुदृढ़ बनाए रखेगा। सेला।
9हे पमरेश्वर, तेरे मंदिर के भीतर हमने तेरी करुणा पर ध्यान किया है।
10हे परमेश्वर, जैसा तेरा नाम है, वैसी ही तेरी स्तुति भी पृथ्वी के छोर तक होती है; तेरा दाहिना हाथ धार्मिकता से परिपूर्ण है।
11तेरे न्याय के कारण सिय्योन पर्वत हर्षित हो, और यहूदा की बस्तियां आनन्द-विभोर हो।
12सिय्योन के चारों ओर चलो, उसकी परिक्रमा करो, उसके गुम्मटों को गिनो,
13उसके प्राचीरों पर दृष्टि लगाओ, उसके महलों को ध्यान से देखो, कि तुम भावी पीढ़ी से इसका वर्णन कर सको।
14क्योंकि यह है परमेश्वर जो सदा-सर्वदा हमारा परमेश्वर है। मृत्यु तक वह हमारी अगुवाई करेगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)