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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 49 / 150

भजन संहिता 49

1हे देश-देश के सब लोगों, यह सुनो! हे संसार के सब निवासियों, कान लगाओ-

2क्या ऊंच, क्या नीच, क्या धनी, क्या दरिद्र!

3मेरे मुंह से बुद्धि की बातें निकलेंगी, और मेरे हृदय का चिन्तन समझ से भरपूर होगा।

4मैं नीतिवचन पर अपना कान लगाऊँगा, मैं वीणा के स्वर में अपनी पहेली बुझाऊंगा।

5मैं विपत्ति के दिनों में क्यों डरूं, जब मेरे विरोधियों का अधर्म मुझे घेरे हो,

6जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और धन की बहुतायत पर घमंड करते हैं?

7कोई भी मनुष्य मूल्य देकर अपने भाई को कभी नहीं छुड़ा सकता, न उसकी फिरौती में परमेश्वर को कुछ दे सकता है-

8क्योंकि उसके प्राण की छुड़ौती तो भारी है, उसके लिए फिरौती कभी पर्याप्त न होगी-

9कि वह अनन्तकाल तक जीवित रहे, और कब्र को न देखे।

10क्योंकि देखने में आता है कि बुद्धिमान् भी मरते हैं, मूर्ख और पशु-तुल्य मनुष्य दोनों मिट जाते है। और अपनी सम्पत्ति दूसरों के लिए छोड़ जाते है।

11वे मन ही मन सोचते हैं कि हमारे घर सदा-सर्वदा, और हमारे निवासस्थान पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे, इसलिए प्रत्येक ने अपनी भूमि का नाम अपने नाम पर रखा है।

12परन्तु मनुष्य ठाठ-बाट में बना नहीं रहेगाः वह तो पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते है।

13यही तो उनका चलन है जो मूर्ख हैं, और उनका भी जो उनके बाद उनकी बातों को पसन्द करते है। सेला।

14भेड़ों के समान वे अधोलोक की ओर हांके जा रहे हैं, मृत्यु उनका चरवाहा है; और भोर को खरे लोग उन पर प्रभुता करेंगे, और उनका रूप अधोलोक का कौर हो जाएगा, जिससे कि उनका कोई निवासस्थान न रहे।

15परन्तु परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण करेगा। सेला।

16जब कोई धनी हो जाए और उसके घर का वैभव बढ़ जाए, तब तू भयभीत न होना।

17क्योंकि मरने पर वह कुछ भी साथ न ले जाएगा, उसका वैभव उसके साथ कब्र में न जाएगा।

18चाहे वह जीते जी अपनी प्रशंसा करता रहे- और भले ही तेरी सम्पन्नता में लोगों ने तेरी प्रशंसा की हो-

19वह अपने पूर्वजों के समाज में जा मिलेगा, जो कभी उजियाला न देखेंगे।

20प्रतिष्ठित मनुष्य जिसमें समझ न हो,पशुओं के समान है,जो मर मिटते हैं।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)