पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 52 / 150
भजन संहिता 52
1हे वीर, तू बुराई करने पर क्यों घमंड करता है? परमेश्वर की करुणा तो दिन भर बनी रहती है।
2तेरी जीभ तो विनाश गढ़ती है। हे छल के कार्य करने वाले, वह पैने उस्तरे के समान है।
3तू भलाई से बढ़कर बुराई से, और सच से बढ़कर झूठ बोलने से प्रीति रखता है। सेला।
4हे छली जीभ, तू हर विनाशकारी बात से प्रसन्न रहती है।
5परन्तु परमेश्वर तुझे सदा के लिए तोड़ डालेगाः वह तुझे पकड़कर तेरे डेरे से निकाल देगा, और जीवितों के लोक से तुझे उखाड़ फेंकेगा। सेला।
6तब धर्मी इसे देख कर भयभीत होंगे, और यह कहते हुए उस पर हंसेंगेः
7“देखो, यह वही पुरुष है जिसने परमेश्वर को अपना शरणस्थान नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखा, और अपनी दुष्टता में दृढ़ होता गया।”
8परन्तु मैं तो परमेश्वर के भवन में जैतून के हरे-भरे वृक्ष के समान हूं; मैं परमेश्वर की करुणा पर सदा-सर्वदा भरोसा रखता हू।
9मैं तुझे सर्वदा धन्यवाद देता रहूंगा, क्योंकि तूने यह काम किया है, और तेरे भक्तों की उपस्थिति में मुझे तेरे ही नाम की आस होगी, क्याेंकि यह भला है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)