पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 51 / 150
भजन संहिता 51
1हे परमेश्वर, अपनी करुणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह करः अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
2मेरे अधर्म से मुझे पूर्णतः धो दे, और मेरे पाप से मुझे शुद्ध कर।
3क्योंकि मैं अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरे सम्मुख रहता है।
4मैंने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया है, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है वही किया है; इसलिए तू अपनी बात में खरा, और न्याय करने में सच्चा ठहरता है।
5देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
6देख, तू तो हृदय की सच्चाई से ही प्रसन्न होता है, और मन की गहराई में मुझे बुद्धि सिखाएगा।
7जूफे से मुझे शुद्ध कर तो मैं पवित्र हो जाऊंगाः मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत हो जाऊँगा
8मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना; जो हड्डियां तूने तोड़ डाली हैं वे मग्न हो जाए।
9अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सब अधर्मों को मिटा डाल।
10हे परमेश्वर, मुझमें शुद्ध हृदय उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा फिर से जागृत कर।
11मुझे अपने सामने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझसे अलग न कर।
12अपने उद्धार का आनन्द मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल ले।
13तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
14हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से दोषमुक्त कर, तब मेरी जीभ आनन्द से तेरी धार्मिकता के गीत गाएगी।
15हे प्रभु, मेरे होंठों को खोल दे, कि मेरा मुंह तेरी स्तुति-प्रशंसा करे।
16क्योंकि तू बलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं उसे चढ़ाता; तू होमबलि से भी प्रसन्न नहीं होता।
17टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए हृदय को तुच्छ नहीं जानता।
18कृपा करके सिय्योन की भलाई कर, और यरूशलेम की शहरपनाह को बना।
19तब तू धार्मिकता के बलिदान से आनन्दित होगा, अर्थात् होमबलि तथा सर्वांग-पशु की होमबलि से; और तेरी वेदी पर बछड़े बलि चढ़ाए जाएंगे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)