पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 53 / 150
भजन संहिता 53
1मूर्ख ने अपने मन में कहा है, “परमेश्वर है ही नही।” वे भ्रष्ट हैं, उन्होंने अधर्म के घृणित कार्य किए हैं, ऐसा कोई नहीं जो भलाई करता हो।
2परमेश्वर ने स्वर्ग से मनुष्य की सन्तान पर दृष्टि की है कि देखें कि कोई समझदार, कोई परमेश्वर का खोजी है या नही।
3वे सब के सब भटक गए हैं, सब ही भ्रष्ट हो गए हैं; कोई भी नहीं जो भलाई करता हो, एक भी नही।
4क्या उन दुष्कर्मियों को कुछ भी ज्ञान नहीं जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, और कभी परमेश्वर का नाम नहीं लेते?
5जहां भय का कोई कारण न था, वहां वे अत्यन्त भयभीत हुए, क्योंकि परमेश्वर ने उसकी हड्डियों को जो तेरे विरुद्ध छावनी डाले था, तितर-बितर कर दिया; तूने उन्हें लज्जित कर दिया, क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें त्याग दिया था।
6भला होता कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से निकलता! जब परमेश्वर बंधुवाई में पड़ी अपनी प्रजा को लौटा ले आएगा, तो याकूब आनन्द मनाए और इस्राएल मग्न हो।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)