Loading account

पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 64 / 150

भजन संहिता 64

1हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दुहाई दूं तब मेरी पुकार सुन, शत्रु के आतंक से मेरे जीवन की रक्षा कर।

2कुकर्मियों के षड्यंत्र से, अनर्थकारियों के हुल्लड़ से मुझे छिपा ले।

3उन्होंने तो अपनी जीभ को तलवार के समान तेज किया है। उन्होंने कड़वे वचन का तीर साधा है,

4कि छिपकर निर्दोष पर चलाएं; अचानक वे उस पर चलाते हैं, और डरते भी नही।

5वे दुष्ट-योजना को दृढ़ता से अपनाते हैं, वे गुप्त फन्दे लगाने की बात करते हैं; वे कहते हैं, “इन्हें कौन देख सकता है?”

6वे कुटिलता की युक्ति रच कर कहते हैं, “हमने बहुत सोच-समझकर षड्यंत्र रचा है।” मनुष्य का मन और हृदय तो अथाह है।

7परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा; वे अचानक घायल हो जाएंगे।

8वे अपनी ही जीभ के कारण ठोकर खाएंगे; जो उन्हें देखेंगे वे सब अपने-अपने सिर हिलाएंगे।

9तब सब लोग डर जाएंगे और परमेश्वर के कार्य का वर्णन करेंगे, और जो कुछ उसने किया है उस पर ध्यान देंगे।

10धर्मी तो यहोवा के कारण आनन्दित होकर उसका शरणागत होगा, और सब सीधे मन वाले उसमें गर्व करेंगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)