पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 71 / 150
भजन संहिता 71
1हे यहोवा, मैं तेरी शरण में आया हूं, मुझे कभी लज्जित न होने दे।
2अपनी धार्मिकता के कारण मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर, मेरी ओर कान लगा और मुझे बचा।
3तू मेरे लिए आश्रय की चट्टान बन जिसमें मैं नित्य शरण ले सकूं; तूने मेरे उद्धार की आज्ञा दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ है।
4हे मेरे परमेश्वर, मुझे दुष्ट के हाथ से, कुटिल और क्रूर मनुष्य के पंजे से छुड़ा ले,
5क्योंकि तू ही मेरी आशा है; हे प्रभु यहोवा, बचपन से मेरा आधार तू ही है।
6जन्म से मैं तेरे द्वारा सम्भाला गया, तू ही ने मुझे मेरी माता के गर्भ से निकाला, इसलिए मैं निरन्तर तेरी स्तुति करता रहूंगा।
7मैं बहुतों के लिए चमत्कार बन गया हूं, क्योंकि तू मेरा दृढ़ गढ़ है।
8मेरा मुंह तेरी स्तुति से, और दिन-भर तेरी महिमा से भरा रहता है।
9बुढ़ापे के समय मुझे निकाल न देः जब मेरी शक्ति घट जाए तो मुझे त्याग न दे।
10क्योंकि मेरे शत्रुओं ने मेरे विरुद्ध बातें की हैं, और जो मेरे प्राण की घात में हैं उन्होंने यह कहकर आपस में सम्मति की हैः
11“परमेश्वर ने उसे त्याग दिया है; पीछा करके उसे पकड़ लो, क्योंकि उसे छुड़ाने वाला कोई नही।”
12हे परमेश्वर, मुझसे दूर न रह! हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिए फुर्ती कर!
13जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, वे लज्जित हों, और नष्ट हो जाएं जो मेरी हानि की खोज में हैं वे निन्दा और अपमान में डूब जाए।
14परन्तु मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिकाधिक करता रहूंगा।
15मेरा मुंह तेरी धार्मिकता और तेरे उद्धार का वर्णन दिन-भर करता रहेगा, क्योंकि मैं उनका विस्तार नहीं जानता।
16मैं प्रभु यहोवा के सामर्थी कार्यों का वर्णन करता हुआ आऊंगा; मैं तेरी, हां, केवल तेरी ही धार्मिकता का वर्णन करूंगा।
17हे परमेश्वर, तू तो मुझे बचपन से ही सिखाता आया है, और मैं अब तक तेरे अद्भुत कार्योर्ं का प्रचार करता हू।
18मेरे बुढ़ापे में भी, जब मेरे बाल पक जाएं, हे परमेश्वर, मुझे त्याग न दे, जब तक मैं इस पीढ़ी से तेरे सामर्थ्य का, और सब भावी पीढ़ियों से तेरी शक्ति का वर्णन न कर दू।
19क्योंकि हे परमेश्वर, तेरी धार्मिकता तो स्वर्ग तक पहुंचती है, तू जिसने महान् कार्य किए है। हे परमेश्वर, तेरे तुल्य कौन है?
20तू जिसने मुझे बहुत कष्ट और संकट दिखाए हैं, मुझे फिर से जिलाएगा, और पृथ्वी की गहराइयों में से उबार लेगा।
21तू मेरा सम्मान बढ़ा और फिरकर मुझे शान्ति दे।
22हे मेरे परमेश्वर, मैं सारंगी बजाकर तेरी स्तुति, हां, तेरे सत्य की स्तुति करूंगा; हे इस्राएल के पवित्र, मैं वीणा बजाकर तेरा भजन गाऊंगा।
23जब मैं तेरी स्तुति के गीत गाऊंगा तब मेरे होंठ और मेरा प्राण जिसे तूने छुड़ा लिया है, तेरा जय-जयकार करेंगे।
24मेरी जीभ भी दिन भर तेरी धार्मिकता की चर्चा करेगी; क्योंकि मेरी हानि के खोजी लज्जित हुए हैं, वे अपमानित हुए है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)