पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 89 / 150
भजन संहिता 89
1एज्रा-वंशी इथान का एक मश्कील। मैं यहोवा की करुणा के गीत सदा-सर्वदा गाता रहूँगा; मैं अपने मुंह से तेरी सच्चाई का वर्णन पीढ़ी से पीढ़ी तक करता रहूँगा।
2क्योंकि मैंने कहा, “करुणा सदा-सर्वदा स्थिर रहेगी, स्वर्ग में तू अपनी सच्चाई को स्थापित करेगा।
3मैंने अपने चुने हुए से वाचा बांधी है, मैंने अपने दास दाऊद से शपथ खाई है
4कि मैं तेरे वंश को सदा स्थिर रखूँगा और तेरे सिंहासन को पीढ़ी से पीढ़ी तक स्थिर करूंगा।” सेला।
5हे यहोवा, स्वर्ग तेरे अद्भुत कार्यों की प्रशंसा करेगाः और पवित्र लोगों की सभा में तेरी सच्चाई की स्तुति की जाएगी।
6आकाश में ऐसा कौन है जिसकी तुलना यहोवा से की जाए? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जो यहोवा के समान है?
7परमेश्वर तो पवित्र लोगों की सभा में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य है; जो उसके चारों ओर हैं उनमें वही भययोग्य है।
8हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे सामर्थी याह, तेरे समान कौन है? तेरी सच्चाई तो तुझे घेरे हुए है।
9समुद्र के उफान पर तेरा ही अधिकार है; जब उसकी तरंगें उठती हैं तो तू ही उन्हें शान्त करता है।
10तू ही ने रहब को वध किए हुए के समान कुचल डाला, तूने अपने शत्रुओं को अपनी सामर्थी बाहों से छितरा दिया।
11आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है, जगत और जो कुछ उसमें है सबको तूने ही स्थापित किया है।
12उत्तर और दक्षिण को तूने ही सिरजा; ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जय-जयकार करते है।
13तेरी भुजा सामर्थी है, तेरे हाथ बलवान हैं, तेरा दाहिना हाथ प्रबल है।
14धार्मिकता और न्याय तेरे सिंहासन के आधार हैं, करुणा और सच्चाई तेरे आगे-आगे चलती है।
15क्या ही धन्य हैं वे जो आनन्द की ललकार को पहचानते हैं! हे यहोवा, वे तेरे मुख के प्रकाश में चलते है।
16वे दिन-भर तेरे नाम में आनन्दित रहते हैं, और तेरी धार्मिकता के द्वारा महिमान्वित किए जाते है।
17क्योंकि तू ही उनके सामर्थ्य की महिमा है, और तेरी कृपा से ही हमारे सींग ऊंचे किए जाते है।
18क्याेंकि यहोवा हमारी ढाल है, और इस्राएल का पवित्र हमारा राजा है।
19एक समय तूने अपने भक्तों से दर्शन देकर बातें कीं, और कहा, “मैंने एक वीर को सहायता प्रदान की है; मैंने प्रजा में से एक युवक को बढ़ाया है।
20मैंने अपने दास दाऊद को पा लिया है, अपने पवित्र तेल से उसका अभिषेक किया है।
21मेरा हाथ उसके साथ बना रहेगा; मेरी भुजा भी उसे सामर्थी बनाएगी।
22शत्रु उसे छलने न पाएगा, और न कुटिल जन उसे कष्ट देने पाएगा।
23परन्तु मैं उनके विरोधियों को उसके सामने कुचल डालूंगा, और जो उससे घृणा करते हैं उन्हें नष्ट कर दूंगा।
24मेरी सच्चाई और मेरी करुणा उस पर बनी रहेगी, और मेरे नाम से उसका सींग ऊंचा किया जाएगा।
25मैं उसके हाथ को समुद्र तक बढ़ाऊंगा और नदियों को उसके दाहिने हाथ में कर दूंगा।
26वह मुझे पुकार कर कहेगा, ‘तू मेरा पिता है, मेरा परमेश्वर और मेरे उद्धार की चट्टान है।’
27मैं उसे अपना पहलौठा और जगत के सब राजाओं का प्रधान बनाऊंगा।
28मैं अपनी करुणा उस पर सदा बनाए रखूंगा, और मेरी वाचा उसके साथ अटल रहेगी।
29मैं उसके वंश को सदा-सर्वदा और उसके सिंहासन को स्वर्ग के दिनों के बराबर बनाए रखूंगा।
30यदि उसके वंशज मेरी व्यवस्था को त्याग दें, और मेरे नियमों पर न चलें,
31यदि वे मेरी विधियों का उल्लंघन करें, और मेरी आज्ञाओं का पालन न करें,
32तो मैं उनके अपराध का दण्ड सोंटे से और उनके अधर्म का दण्ड कोड़ों से दूंगा।
33परन्तु मैं अपनी करुणा उस पर से न हटाऊंगा, और न अपनी सच्चाई त्यागकर झूठा व्यवहार करूंगा।
34मैं अपनी वाचा को नहीं तोडूंगा, और न अपने होंठों से निकली बातों को बदलूंगा।
35एक बार मैं अपनी पवित्रता की शपथ खा चुका हूं; मैं दाऊद से झूठ न बोलूंगा।
36उसका वंश सर्वदा चलता रहेगा, और उसका सिंहासन मेरे सम्मुख सूर्य-सा बना रहेगा।
37वह चन्द्रमा के समान सर्वदा के लिए स्थापित किया जाएगा- आकाश की साक्षी तो विश्वसनीय है।” सेला।
38परन्तु तूने अपने अभिषिक्त को त्याग कर तुच्छ जाना है; तू तो उससे अत्यन्त क्रोधित हुआ है।
39तूने अपने दास की वाचा को ठुकरा दिया; तूने उसके मुकुट को धूल में मिलाकर निन्दित कर दिया।
40तूने उसकी दीवारों को तोड़ डाला है, और उसके गढ़ों को खंडहर कर दिया है।
41जो भी वहां से निकलते हैं सब उसे लूटते हैं, अपने पड़ोसियों में वह लज्जा का कारण बन गया है।
42तूने उसके विरोधियों के दाहिने हाथ को प्रबल किया है, उसके सब शत्रुओं को आनन्दित किया है।
43तू उसकी तलवार की धार को मोड़ देता है, और युद्ध में उसके पैर जमने नहीं देता।
44तूने उसके वैभव को मिटा दिया है, और उसके सिंहासन को भूमि पर पटक दिया है।
45तूने उसकी जवानी के दिनों को घटा दिया है, और उसे लज्जा से ढांप दिया है। सेला।
46हे यहोवा, कब तक? क्या तू अपने को सर्वदा छिपाए रहेगा? क्या तेरा कोप अग्नि के समान भड़कता रहेगा?
47स्मरण कर कि मेरा जीवन कितना क्षणिक है। तूने सब मनुष्यों को क्यों व्यर्थ सिरजा है?
48वह कौन मनुष्य है जो सदा जीवित रहे और मृत्यु को न देखे? क्या वह अपना प्राण अधोलोक से बचा सकता है? सेला।
49हे प्रभु, कहां है तेरी प्राचीनकाल की समस्त करुणा जिसकी शपथ तूने अपनी सच्चाई में दाऊद से खाई थी?
50हे प्रभु, अपने दासों की निन्दा को स्मरण कर, कि मैं अपने हृदय में विभिन्न जातियों की निन्दा को कैसे सहता हूं,
51कि हे प्रभु, तेरे शत्रुओं ने किस प्रकार निन्दा की है, उन्होंने पग-पग पर तेरे अभिषिक्त की कैसी निन्दा की है!
52यहोवा सदा-सर्वदा धन्य है! आमीन, फिर आमीन।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)