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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 90 / 150

भजन संहिता 90

1परमेश्वर के जन मूसा की प्रार्थना। हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारा निवासस्थान बना हुआ है।

2इससे पूर्व कि पर्वत उत्पन्न हुए, या तूने पृथ्वी और जगत की सृष्टि की, हां, अनादिकाल से अनन्तकाल तक, तू ही परमेश्वर है।

3तू मनुष्य को धूल में पुनः लौटा देता है। और कहता है, “हे मनुष्य की सन्तान, लौट जाओ।”

4क्योंकि हजार वर्ष तेरी दृष्टि में कल के दिन के समान हैं, जो बीत गया, या जैसे रात का एक पहर।

5तू उन्हें बाढ़ की भांति बहा देता है; वे नींद के झोंके या भोर को उगने वाली घास के समान होते हैं;

6वह भोर को लहलहाती और बढ़ती है, परन्तु सांझ को मुर्झाकर सूख जाती है।

7तेरे क्रोध से हम भस्म हुए हैं, और तेरे कोप से हम घबरा गए है।

8तूने हमारे अधर्मों को अपने सामने, और हमारे गुप्त पापों को अपने मुख के प्रकाश में रखा है।

9क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में कट जाते हैं, हम अपने वर्ष आह के समान बिताते है।

10हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं; चाहे बल के कारण अस्सी भी हो जाएं फिर भी उनके घमंड का आधार कष्ट और शोक ही है, क्योंकि यह शीघ्र समाप्त हो जाती है और हम जाते रहते है।

11तेरे क्रोध की शक्ति को, और तेरे भययोग्य रोष को कौन समझता है?

12अतः हमको अपने दिन गिनना सिखा, कि हम बुद्धि से भरा मन पाए।

13हे यहोवा, लौट आ! कब तक? अपने दासों पर तरस खा।

14भोर को हमें अपनी करुणा से तृप्त कर कि हम जीवन भर जय-जयकार और आनन्द करते रहे।

15जितने दिन तूने हमें पीड़ित किया, और जितने वर्ष हमने क्लेश भोगे, उन्हीं के अनुसार हमें आनन्द दे।

16तेरे कार्य तेरे दासों पर और तेरा प्रताप उनकी सन्तान पर प्रकट हो।

17हमारे परमेश्वर यहोवा की कृपा हम पर हो; हमारे हाथों के कार्य को हमारे लिए दृढ़ कर। हां, हमारे हाथों के कार्य को दृढ़ कर

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)