Loading account

पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 91 / 150

भजन संहिता 91

1जो परमप्रधान की शरण में वास करता है, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

2मैं यहोवा के विषय में कहूंगा, “वह मेरा शरणस्थान और मेरा दृढ़ गढ़ है, वह मेरा परमेश्वर है जिस पर मैं भरोसा रखता हू।”

3क्योंकि वही तुझे बहेलिए के जाल से और महामारी से बचाता है।

4वह अपने पंखों से तुझे ढांप लेगा, और उसके परों तले तू शरण लेगा, उसकी सच्चाई ढाल और झिलम है।

5तू न रात के आतंक से, और न दिन के उड़ते तीर से भयभीत होगा;

6न उस महामारी से जो अन्धकार में फैलती, और न उस विनाश से जो दोपहर में उजाड़ता है।

7तेरे निकट हजार और तेरे दाहिने हाथ दस हजार गिरेंगे, पर वह तुझ तक नहीं पहुँचेगा।

8तू तो केवल अपनी आंखों से निहारेगा, और दुष्टों का अन्त देखेगा।

9क्योंकि तूने यहोवा को, जो मेरा शरणस्थान है, अर्थात् परमप्रधान को अपना निवासस्थान बनाया है।

10इसलिए न कोई विपत्ति तुझ पर आएगी, न कोई दुख तेरे डेरे के निकट आने पाएगा।

11क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे विषय में आज्ञा देगा, कि वे तेरे सब मार्गों में तेरी रक्षा करे।

12वे तुझे हाथों-हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पैर में पत्थर से ठेस लगे।

13तू सिंह और नाग को कुचलेगा, जवान सिंह और अजगर को तू रौंदेगा।

14“उसने मुझसे प्रेम किया है, इसलिए मैं उसे छुड़ाऊंगा; मैं उसे ऊंचे स्थान पर सुरक्षित रखूंगा, क्योंकि उसने मेरा नाम जान लिया है।

15जब वह मुझे पुकारेगा तब मैं उसे उत्तर दूंगा; संकट के समय मैं उसके साथ रहूंगा, मैं उसे छुड़ाऊंगा और उसका सम्मान बढ़ाऊंगा।

16मैं उसे दीर्घायु से तृप्त करूंगा और अपने उद्धार का दर्शन कराऊंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)