नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 15 / 22
प्रकाशितवाक्य 15
1फिर मैंने स्वर्ग में एक और महान् और अद्भुत चिह्न देखा। सात स्वर्गदूत थे जिनके पास सात अन्तिम विपत्तियां थीं, क्योंकि इनके समाप्त हो जाने पर परमेश्वर का प्रकोप पूर्ण हो जाता है।
2और मैंने मानो अग्नि-मिश्रित कांच का एक समुद्र देखा; और उनको भी जो उस पशु, उसकी मूर्ति तथा उसके नाम के अंक पर विजयी हुए थे, परमेश्वर की वीणाएं लिए हुए, उस कांच के समुद्र पर खड़े देखा।
3वे परमेश्वर के दास मूसा का गीत और मेमने का गीत यह कहते हुए गा रहे थेः “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे काम महान् और अद्भुत है। हे जाति-जाति के राजा, तेरे मार्ग धर्मसंगत और सच्चे है।
4हे प्रभु, कौन तेरा भय न मानेगा, और तेरे नाम की महिमा न करेगा? क्योंकि तू ही पवित्र है। सब जातियां आकर तेरी उपासना करेंगी, क्योंकि तेरे न्याय के कार्य प्रकट हो गए है।”
5इन बातों के पश्चात् मैंने देखा कि स्वर्ग में साक्षी के तम्बू का मन्दिर खोला गया,
6और वे सात दूत जिनके पास सात विपत्तियां थीं, मलमल के शुद्ध व चमकदार वस्त्र पहिने हुए तथा अपने सीने पर स्वर्णिम पट्टियां बांधे हुए मंदिर से निकले।
7और उन चारों प्राणियों में से एक ने सात स्वर्गदूतों को युगानुयुग जीवते परमेश्वर के प्रकोप से भरे हुए स्वर्ण के सात कटोरे दिए।
8तब मंदिर परमेश्वर की महिमा और सामर्थ के धुुंए से भर गया; और जब तक उन सात स्वर्गदूतों की सात विपत्तियां समाप्त न हुईं, कोई मंदिर में प्रवेश न कर सका।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)