रोमियों 1:20
क्योंकि जगत की सृष्टि से ही परमेश्वर के अदृशय गुण, अनन्त सामर्थ्य और परमेश्वरत्व उसकी रचना के द्वारा समझे जाकर स्पष्ट दिखाई देते हैं, इसलिए उनके पास कोई बहाना नही।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: रोमियों 1
17क्योंकि इसमें परमेश्वर की धार्मिकता विश्वास से और विश्वास के लिए प्रकट होती है; जैसा कि लिखा है, “परन्तु धर्मी मनुष्य विश्वास से जीवित रहेगा।”
19परमेश्वर से सम्बन्धित ज्ञान मनुष्यों पर प्रकट है, क्योंकि परमेश्वर ने इसे उन पर प्रकट किया है। इसलिए परमेश्वर का प्रकोप मनुष्यों की समस्त अभक्ति और अधार्मिकता पर स्वर्ग से प्रकट हो रहा है, क्योंकि वे सत्य को अधर्म से दबाए रखते है।
20क्योंकि जगत की सृष्टि से ही परमेश्वर के अदृशय गुण, अनन्त सामर्थ्य और परमेश्वरत्व उसकी रचना के द्वारा समझे जाकर स्पष्ट दिखाई देते हैं, इसलिए उनके पास कोई बहाना नही।
21क्योंकि, यघपि वे परमेश्वर को जानते थे, फिर भी उन्होंने उसे न तो परमेश्वर के उपयुक्त सम्मान, और न ही धन्यवाद दिया; वरन् वे अनर्थ कल्पनाएं करने लगे, और उनका निर्बुद्धि मन अन्धकारमय हो गया।
22बुद्धिमान होने का दावा करके वे मूर्ख बन गए,
23उन्होंने अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नशवर मनुष्य, पक्षियों, चौपायों और रेंगनेवाले जन्तुओं की मूर्ति की समानता में बदल डाला।
संबंधित पद
- रोमियों 1:19
परमेश्वर से सम्बन्धित ज्ञान मनुष्यों पर प्रकट है, क्योंकि परमेश्वर ने इसे उन पर प्रकट किया है। इसलिए परमेश्वर का प्रकोप मनुष्यों की समस्त अभक्ति और अधार्मिकता पर स्वर्ग से प्रकट हो रहा है, क्योंकि वे सत्य को अधर्म से दबाए रखते है।
- यशायाह 40:26
अपनी आंखें उठाकर देखो कि किसने इन तारागणों की सृष्टि की है, कौन उनके गणों में से एक-एक की अगुवाई करता, और उन सबको नाम ले-लेकर बुलाता है। उसके विशाल सामर्थ्य और उसकी महाशक्ति के कारण उनमें से एक भी न छूटेगा।
- रोमियों 2:15
इस प्रकार वे व्यवस्था के कार्य अपने अपने हृदय में लिखा हुआ दर्शाते हैं, और उनके विवेक भी उसकी साक्षी देते हैं, और उनके परस्पर विरोधी विचार कभी उन्हें दोषी या कभी निर्दोष ठहराते हैं-
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