रोमियों 10:13
क्योंकि, “जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: रोमियों 10
10मनुष्य जब हृदय से विश्वास करता है तो उसका परिणाम धार्मिकता होता है, और जब वह मुंह से अंगीकार करता है तो उसका परिणाम उद्धार होता है।
11क्योंकि पवित्रशास्त्र कहता है, “जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।”
12क्योंकि यहूदी और यूनानी में कोई अन्तर नहीं है, एक ही प्रभु सबका प्रभु है, और उन सब के प्रति जो उसको पुकारते हैं अत्यन्त उदार है।
13क्योंकि, “जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।”
14फिर वे उसे क्यों पुकारेंगे जिस पर उन्होंने विश्वास ही नहीं किया? और वे उस पर कैसे विश्वास करेंगे जिसके विषय में उन्होंने सुना ही नहीं? भला वे प्रचारक के बिना कैसे सुनेंगे?
15और वे प्रचार कैसे करेंगे जब तक कि भेजे न जाएं? ठीक जैसा कि लिखा है, “उनके पांव कैसे सुहावने हैं जो भली बातों का सुसमाचार लाते हैं!”
16परन्तु उन सभी ने सुसमाचार पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि यशायाह कहता है, “हे प्रभु, किसने हमारे सन्देश पर विश्वास किया है?”
संबंधित पद
- प्रेरितों के काम 2:21
और ऐसा होगा कि जो कोई प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पाए्रगा।’
- योएल 2:32
और ऐसा होगा कि जो कोई यहोवा का नाम लेगा वह उद्धार पाएगा, क्योंकि सिय्योन पर्वत पर और यरूशलेम में, जैसा यहोवा ने कहा है, उद्धार पाने वाले होंगे, अर्थात् बचने वाले जिन्हें यहोवा ने बुलाया है।
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