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रोमियों 12:2

इस संसार के अनुरूप न बनो, परन्तु अपने मन के नए हो जाने से तुम परिवर्तित हो जाओ कि परमेश्वर की भली, ग्रहणयोग्य और सिद्ध इच्छा को तुम अनुभव से मालूम करते रहो।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: रोमियों 12

1अतः हे भाइयो, मैं परमेश्वर की दया का स्मरण दिलाकर तुमसे आग्रह करता हूँ कि तुम अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और ग्रहणयोग्य बलिदान करके परमेश्वर को समर्पित कर दो। यही तुम्हारी आत्मिक आराधना है।

2इस संसार के अनुरूप न बनो, परन्तु अपने मन के नए हो जाने से तुम परिवर्तित हो जाओ कि परमेश्वर की भली, ग्रहणयोग्य और सिद्ध इच्छा को तुम अनुभव से मालूम करते रहो।

3क्योंकि मैं उस अनुग्रह के द्वारा जो मुझे दिया गया है, तुममें से प्रत्येक से कहता हूं कि कोई भी अपने आप को जितना समझना चाहिए उससे बढ़कर न समझे; परन्तु परमेश्वर द्वारा दिए गए विश्वास के परिमाण के अनुसार ही सुबुद्धि से अपने आप को समझे।

4क्योंकि जैसे हमारे शरीर में अनेक अंग हैं और सभी अंगों का एक ही कार्य नहीं है,

5वैसे ही हम भी जो अनेक हैं, मसीह में एक देह हैं, और एक दूसरे के अंग है।

पूरा अध्याय पढ़ें: रोमियों 12

संबंधित पद

  • 1 पतरस 1:14

    आज्ञाकारी बच्चों के सदृश अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के अनुसार आचरण न करो।

  • इफिसियों 4:22–24

    कि तुम पिछले चालचलन के पुराने मनुष्यत्व को उतार डालो जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है।

  • 2 कुरिन्थियों 5:17

    इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है। पुरानी बातें बीत गईं। देखो, नई बातें आ गई है।

  • कुलुस्सियों 3:10

    और नए मनुष्यत्व को पहिन लिया है जो अपने सृष्टिकर्ता के स्वरूप के अनुसार सत्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए नया बनता जाता है।

  • 1 यूहन्ना 2:15–17

    संसार से प्रेम न करो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में है। यदि कोई संसार से प्रेम करता है तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।

  • इफिसियों 5:17

    इस बारण निर्बुद्धि न हो, परन्तु यह जान लो कि प्रभु की इच्छा क्या है।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).