नया नियम · 1 यूहन्ना · अध्याय 2 / 5
1 यूहन्ना 2
1मेरे बच्चो, मैं तुम्हें ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो। परन्तु यदि कोई पाप करता है तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् यीशु मसीह जो धर्मी है;
2वह स्वयं हमारे पापों का प्रायश्चित्त है, और हमारा ही नहीं वरन् समस्त संसार के पापों का भी।
3यदि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, तो इसी से हमें ज्ञात होता है कि हम उसे जान गए है।
4जो कहता है, “मैं उसे जान गया हूँ” और उसकी आज्ञाओं का पालन नहीं करता, वह झूठा है, और उसमें सत्य नहीं;
5परन्तु जो उसके वचन का पालन करता है, उसमें सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हो चुका है। इसी से हम जानते हैं कि हम उस में हैं:
6जो कहता है कि मैं उस में बना रहता हूँ तो वह स्वयं भी वैसा ही चले जैसा कि वह चलता था।
7प्रियो, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिख रहा हूँ, परन्तु वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से ही तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वही वचन है जो तुम सुन चुके हो।
8फिर भी मैं तुम्हें एक नई आज्ञा लिख रहा हूँ जो उस में और तुम में सत्य है; क्योंकि अन्धकार मिटता जा रहा है और सत्यज्योति चमक रही है।
9जो कोई यह कहता है कि मै ज्योति में हूँ फिर भी अपने भाई से घृणा करता है, वह अब तक अन्धकार ही में है।
10जो कोई अपने भाई से प्रेम करता है, वह ज्योति में बना रहता है, और उसमें कोई ठोकर का कारण नही।
11परन्तु जो कोई अपने भाई से घृणा करता है, वह अन्धकार में है और अन्धकार में चलता है, और नहीं जानता कि कहां जा रहा है, क्योंकि अन्धकार ने उसकी आंखें अन्धी कर दी है।
12बच्चो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुम्हारे पाप उसके नाम के कारण क्षमा हुए है।
13पितरो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योेंकि तुम उसको जानते हो जो आदि से है। युवको, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुमने उस दुष्ट पर विजय पाई है। बच्चो, मैंने तुम्हें हसलिए लिखा है, क्योंकि तुम पिता को जानते हो।
14पितरो, मैने तुम्हें इसलिए लिखा है, क्योंकि तुम उसको जानते हो जो आदि से है। युवको, मैंने तुम्हें इसलिए लिखा है, क्योंकि तुम बलवान हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, तथा तुमने उस दुष्ट पर विजय पा ली है।
15संसार से प्रेम न करो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में है। यदि कोई संसार से प्रेम करता है तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।
16क्योंकि वह सब जो संसार में है, अर्थात् -शरीर की अभिलाषा, आँखों की लालसा और जीवन का अहंकार, पिता की ओर से नहीं परन्तु संसार की ओर से है।
17संसार तथा उसकी लालसाएं भी मिटती जा रही हैं, परन्तु वह जो परमेश्वर की इच्छा पूरी करता है सर्वदा बना रहेगा।
18बच्चो, यह अन्तिम घड़ी है; और जैसा तुमने सुना था कि मसीह-विरोधी आने वाला है, वैसे ही अब अनेक मसीह-विरोधी उठ खड़े हुए है; इसी से हम जानते हैं कि यह अन्तिम घड़ी है।
19वे निकले तो हम ही में से, परन्तु वास्तव में हम में से नहीं थे; क्योंकि यदि वे हम में से होते तो हमारे साथ रहते; परन्तु वे निकल इसलिए गए कि यह प्रकट हो जाए कि वे सब हम में से नहीं है।
20परन्तु तुम्हारा अभिषेक तो उस पवित्र से हुआ है, और तुम सब जानते हो।
21मैंने तुम्हें इसलिए नहीं लिखा कि तुम सत्य को नहीं जानते, वरन् इसलिए कि तुम उसे जानते हो, क्योेंकि कोई झूठ, सत्य की ओर से नही।
22झूठा कौन है केवल वह जो यीशु के मसीह होने का इनकार करता है? यही मसीह-विरोधी है, अर्थात् जो पिता और पुत्र का इनकार करता है।
23जो पुत्र का इनकार करता है, उसके पास पिता नहीं; जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।
24जहां तक तुम्हारा सम्बन्ध है, तुमने जो आरम्भ से सुना है, उसे अपने में बना रहने दो। जो कुछ तुमने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे तो तुम भी पुत्र में और पिता में बने रहोगे।
25जो प्रतिज्ञा स्वयं उसने हम से की है, वह यह है, अर्थात् अनन्त जीवन।
26मैंने ये बातें तुम्हें उन लोगों के सम्बन्ध में लिखी हैं जो तुम्हें धोखा देने का यत्न कर रहे है।
27पर जहां तक तुम्हारा सम्बन्ध है, वह अभिषेक जो तुमने उस से प्राप्त किया है, तुम में बना रहता है, और तुम्हें इस बात की आवश्यकता नहीं कि कोई तुम्हें सिखाए परन्तु जिस प्रकार उसका वह अभिषेक तुम्हें सब बातों के विषय में सिखाता है, और सत्य है और झूठ नहीं, और जैसा कि उसने तुम्हें सिखाया है, तुम उसमें बने रहो।
28अतः हे बच्चो, उसमेें बने रहो, जिससे कि जब वह प्रकट हो तो हमें साहस हो और उसके आगमन पर हमें उसके सम्मुख लज्जित न होना पड़े।
29यदि तुम जानते हो कि वह धर्मी है तो यह भी जानते हो कि प्रत्येक जो धार्मिकता पर आचरण करता है, उस से उत्पन्न हुआ है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)