1 यूहन्ना 2:15
संसार से प्रेम न करो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में है। यदि कोई संसार से प्रेम करता है तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: 1 यूहन्ना 2
12बच्चो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुम्हारे पाप उसके नाम के कारण क्षमा हुए है।
13पितरो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योेंकि तुम उसको जानते हो जो आदि से है। युवको, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुमने उस दुष्ट पर विजय पाई है। बच्चो, मैंने तुम्हें हसलिए लिखा है, क्योंकि तुम पिता को जानते हो।
14पितरो, मैने तुम्हें इसलिए लिखा है, क्योंकि तुम उसको जानते हो जो आदि से है। युवको, मैंने तुम्हें इसलिए लिखा है, क्योंकि तुम बलवान हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, तथा तुमने उस दुष्ट पर विजय पा ली है।
15संसार से प्रेम न करो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में है। यदि कोई संसार से प्रेम करता है तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।
16क्योंकि वह सब जो संसार में है, अर्थात् -शरीर की अभिलाषा, आँखों की लालसा और जीवन का अहंकार, पिता की ओर से नहीं परन्तु संसार की ओर से है।
17संसार तथा उसकी लालसाएं भी मिटती जा रही हैं, परन्तु वह जो परमेश्वर की इच्छा पूरी करता है सर्वदा बना रहेगा।
18बच्चो, यह अन्तिम घड़ी है; और जैसा तुमने सुना था कि मसीह-विरोधी आने वाला है, वैसे ही अब अनेक मसीह-विरोधी उठ खड़े हुए है; इसी से हम जानते हैं कि यह अन्तिम घड़ी है।
संबंधित पद
- याकूब 4:4
हे व्यभिचारिणियों, क्या तुम नहीं जानतीं कि संसार में मित्रता करना परमेश्वर से शत्रुता करनी है? अतः यदि कोई संसार से मित्रता रखना चाहता है तो वह अपने आप को परमेश्वर का शत्रु बनाता है।
- रोमियों 12:2
इस संसार के अनुरूप न बनो, परन्तु अपने मन के नए हो जाने से तुम परिवर्तित हो जाओ कि परमेश्वर की भली, ग्रहणयोग्य और सिद्ध इच्छा को तुम अनुभव से मालूम करते रहो।
- मत्ती 6:24
कोई भी व्यक्ति दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह या तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम करेगा, या एक से घनिष्टता रखेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।
- कुलुस्सियों 3:1–2
इसलिए यदि तुम मसीह के साथ जीवित किए गए तो उन वस्तुओं की खोज में लगे रहो जो स्वर्ग की हैं, जहां मसीह विघमान है और परमेश्वर की दाहिनी ओर विराजमान है।
- लूका 16:13
कोई भी सेवक दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि या तो वह एक से घृणा और दूसरे से प्रेम करेगा, या फिर एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।”
- 1 यूहन्ना 5:4–5
क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है; और वह विजय जिसने संसार पर जय प्राप्त की यह है-हमारा विश्वास।
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