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नया नियम · रोमियों · अध्याय 5 / 16

रोमियों 5

1इसलिए विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाकर अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर से हमारा मेल है।

2उसी के द्वारा विश्वास से, उस अनुग्रह में जिसमें हम स्थिर हैं, हमने प्रवेश पाया है, और परमेश्वर की महिमा में भागी होंगे इस आशा में कि हम अत्यान्दित होते है।

3इतना ही नहीं, परन्तु हम अपने क्लेशों में भी आनन्दित होते हैं, यह जानते हुए कि क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है,

4तथा धैर्य से खरा चरित्र, और खरे चरित्र से आशा उत्पन्न होती है;

5आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है, उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उँडेला गया है।

6क्योंकि जब हम निस्सहाय ही थे, तब ठीक समय पर मसीह भक्तिहीनों के लिए मरा।

7शायद ही किसी धर्मी मनुष्यों के लिए कोई मरे; पर हो सकता है कि किसी भले मनुष्य के लिए कोई मरने का साहस भी कर ले।

8परन्तु परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे प्रति इस प्रकार प्रमाणित करता है कि जब हम पापी ही थे, मसीह हमारे लिए मरा।

9अतः इससे कहीं बढ़कर उसके लहू के द्वारा धर्मी ठहराए जाकर, हम उसके द्वारा परमेश्वर के प्रकोप से क्यों न बचेंगे?

10क्योंकि जब हम शत्रु ही थे, हमारा मेल परमेश्वर के साथ उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हुआ, तो उससे बढ़कर, अब मेल हो जाने पर हम उसके जीवन के द्वारा उद्धार क्यों न पाएंगे !

11केवल यही नहीं, परन्तु हम परमेश्वर में अपने प्रभु यीशु के द्वारा आनन्दित भी होते हैं, जिसके द्वारा अब हमारा मेल हो गया है।

12अतः जिस प्रकार एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया तथा पाप के द्वारा मृत्यु ने, उसी प्रकार मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब नें पाप किया-

13क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था; परन्तु जहां व्यवस्था नहीं वहां पाप की गणना नहीं होती।

14तथापि मृत्यु ने आदम से लेकर मूसा तक शासन किया, यहां तक कि उन पर भी जिन्होंने आदम के अपराध के समान पाप नहीं किया था; आदम उसका प्रतीक था जो आने वाला था।

15परन्तु वरदान अपराध के समान नहीं है। क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कारण अनेक मर गए, तब उससे कहीं अधिक परमेश्वर का अनुग्रह तथा उस एक मनुष्यकृयीशु मसीहकृके अनुग्रह का दान बहुतों को प्रचुरता से मिला।

16यह दान उस पाप के समान नहीं जो एक मनुष्य के पाप करने के द्वारा आया; क्योंकि एक ओर तो एक ही अपराध के कारण न्याय आरम्भ हुआ जिसका प्रतिफल दण्ड हुआ, परन्तु दूसरी ओर अनेक अपराधों के कारण ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ जिसका प्रतिफल धर्मी ठहराया जाना हुआ।

17जब एक ही मनुष्य के अपराध के कारण, मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा शासन किया, तो इससे बढ़कर वे जो अनुग्रह और धार्मिकता के दान को प्रचुरता से पाते हैं उस एक ही यीशु मसीह-के द्वारा जीवन में राज्य करेंगे।

18अतः जिस प्रकार एक ही अपराध का प्रतिफल सब मनुष्यों के लिए दण्ड की आज्ञा हुआ, उसी प्रकार धार्मिकता के एक ही कार्य का प्रतिफल सब मनुष्यों के लिए धर्मी ठहराया जाना हुआ।

19जैसे एक मनुष्य के आज्ञा-उल्लंघन से अनेक पापी ठहराए गए, वैसे ही एक मनुष्य की आज्ञाकारिता से अनेक मनुष्य धर्मी ठहराए जाएंगे।

20व्यवस्था ने प्रवेश किया कि अपराध बढ़ जाए; परन्तु जहां पाप बढ़ा, वहीं अनुग्रह में उससे भी कहीं अधिक वृद्धि हुई,

21कि जैसे पाप ने मृत्यु में राज्य किया, वैसे ही अनुग्रह भी धार्मिकता से हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनन्त जीवन के लिए राज्य करे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)