रोमियों 8:28
हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: रोमियों 8
25यदि हम उसकी आशा करते हैं जिसे नहीं देखते, तो धीरज से उत्सुकतापूर्वक उसकी प्रतीक्षा करते है।
26इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है; क्योंकि हम नहीं जानते कि हमें प्रार्थना किस प्रकार करना चाहिए, परन्तु आत्मा स्वयं भी ऐसी आहें भर-भर कर जो अवर्णनीय हैं, हमारे लिए विनती करता है,
27और हृदयों को जांचने वाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है, क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिए परमेश्वर के इच्छानुसार विनती करता है।
28हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए है।
29क्योंकि जिनके विषय में उसे पूर्वज्ञान था, उसने उन्हें पहले से ठहराया भी कि वे उसके पुत्र के स्वरूप में हो जाएं, जिससे कि वह बहुत-से भाइयों में पहलौठा ठहरे;
30फिर जिन्हें उसने पहले से ठहराया है, उन्हें बुलाया भी; और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया; और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
31अब हम इन बातों के विजय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में है, तो कौन हमारे विरुद्ध है?
संबंधित पद
- 1 पतरस 5:10
तुम्हारे थोड़ी देर यातना सहने के पश्चात् सारे अनुग्रह का परमेश्वर जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिए बुलाया-वह स्वयं ही तुम्हें सिद्ध, दृढ़, बलवन्त और स्थिर करेगा।
- याकूब 1:12
धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है, क्योंकि खरा निकल कर वह जीवन के उस मुकुट को प्राप्त करेगा जिसे प्रभु ने अपने प्रेेम रखने वालों को देने की प्रतिज्ञा की है।
- उत्पत्ति 50:20
तुमने तो मेरे साथ बुराई करने की ठानी थी, परन्तु परमेश्वर ने उसी को भलाई के लिए ले लिया, जैसा कि आज के दिन हो रहा है कि बहुत से लोगों के प्राण बचे।
- रोमियों 5:3–5
इतना ही नहीं, परन्तु हम अपने क्लेशों में भी आनन्दित होते हैं, यह जानते हुए कि क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है,
- 1 कुरिन्थियों 2:9
पर जैसा लिखा है, ‘‘जिन बातों को आंख ने नहीं देखा और न कान ने सुना, और जो मनुष्य के हृदय में नहीं समाईं, उन्हीं को परमेश्वर ने अपने प्रेम करने वालों के लिए तैयार किया है।’’
- रोमियों 8:35–39
कौन हमको मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या सताव, या अकाल, या नंगापन, या जोखिम, या तलवार?
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