रोमियों 8:30
फिर जिन्हें उसने पहले से ठहराया है, उन्हें बुलाया भी; और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया; और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: रोमियों 8
27और हृदयों को जांचने वाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है, क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिए परमेश्वर के इच्छानुसार विनती करता है।
28हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए है।
29क्योंकि जिनके विषय में उसे पूर्वज्ञान था, उसने उन्हें पहले से ठहराया भी कि वे उसके पुत्र के स्वरूप में हो जाएं, जिससे कि वह बहुत-से भाइयों में पहलौठा ठहरे;
30फिर जिन्हें उसने पहले से ठहराया है, उन्हें बुलाया भी; और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया; और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
31अब हम इन बातों के विजय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में है, तो कौन हमारे विरुद्ध है?
32वह जिसने अपने पुत्र को भी नहीं छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिए दे दिया, तो वह उसके साथ हमें सब कुछ उदारता से क्यों न देगा?
33परमेश्वर के चुने हुओं पर कौन दोष लगाएगा? परमेश्वर ही है, वह जो धर्मी ठहराता है;
संबंधित पद
- प्रकाशितवाक्य 17:14
वे मेमने के साथ युद्ध करेंगे और मेमना उन पर विजयी होगा, क्योंकि वह प्रभुओं का प्रभु और राजाओं का राजा है; और जो उसके साथ हैं वे बुलाए हुए, चुने हुए आदि विश्वासी लोग है।
- रोमियों 8:28
हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए है।
- इफिसियों 1:11
उसी में जो अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार सब कुछ करता है , हमने भी उसके अभिप्राय के अनुसार, पहिले से ठहराए जाकर, उत्तराधिकार प्राप्त किया है,
- रोमियों 9:23–24
उसने यह इसलिए किया कि वह अपनी महिमा का धन दया के उन पात्रों पर प्रकट करे, जिन्हें उसने पहले से ही महिमा के लिए तैयार किया था,
- इफिसियों 1:5
उसने हमें अपनी इच्छा के भले अभिप्राय के अनुसार पहिले से ही अपने लिए यीशु मसीह के द्वारा लेपालक पुत्र होने के लिए ठहराया,
- 1 पतरस 2:9
परन्तु तुम एक चुना हुआ वंश, राजकीय याजकाें का समाज, एक पवित्र प्रजा, और परमेश्वर की निज सम्पत्ति हो, जिस से तुम उसके महान् गुणों को प्रकट करो जिसने तुम्हें अंधकार से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है।
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