पुराना नियम · रूत · अध्याय 2 / 4
रूत 2
1नाओमी के पति का एक धनी कुटुम्बी था जिसका नाम बोअज़ था। वह एलीमेलेक के परिवार का था।
2और मोआबिन रूत ने नाओमी से कहा, “मुझे खेत में जाने की आज्ञा दे कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे उसके पीछे सीला बीनू।” और उसने उससे कहा, “जा, मेरी बेटी।”
3अतः वह जाकर एक खेत में लवनेवालों के पीछे सीला बीनने लगी और संयोगवश जिस खेत में वह गई थी, वह एलीमेलेक के एक कुटुम्बी बोअज़ का था।
4और देखो बोअज़ बैतलहम से आया और खेत लवनेवालों से कहा, “यहोवा तुम्हारे संग रहे।” और उन्होंने उससे कहा, “यहोवा तुझे आशीष दे।”
5तब बोअज़ ने अपने उस सेवक से जो फसल काटने वालों के ऊपर ठहराया गया था, पूछा, “यह युवती किसकी है?”
6और उस सेवक ने जो फसल काटने वालों के ऊपर नियुक्त था उसे उत्तर दिया, “यह वहीं मोआबिन युवती है जो मोआब देश से नाओमी के संग लौट आई है।
7और उसने कहा था, ‘मुझे फसल काटने वालों के पीछे-पीछे पूलों के बीच सीला बीनने और बालें बटोरने की आज्ञा दे।’ इस प्रकार यह आई और सवेरे से अब तक काम में लगी है; केवल थोड़ी ही देर यह घर में रही है।”
8तब बोअज़ ने रूत से कहा, “हे मेरी बेटी ध्यान से सुनः किसी दूसरे खेत में सीला बीनने को न जाना। और यह भी कि तू इस खेत को छोड़कर न जाना पर मेरी दासियों के संग यहीं रहना।
9जिस खेत को वे लवती हों उसी पर तेरी दृष्टि लगी रहे और जहाँ वे जाएं उन्हीं के पीछे-पीछे जाना। मैंने सेवकों को आज्ञा दी है कि वे तुझे स्पर्श न करे। जब तुझे प्यास लगे तो घड़ों के पास जाना और उस पानी में से पीना जिसे जवान लोग भरते है।”
10तब वह भूमि तक झुक कर मुंह के बल गिरी और उससे बोली, “मैं तो परदेशिन हूँ। क्या कारण है कि तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हुई और तू ने मेरी सुधि ली है?”
11और बोअज़ ने उसे उत्तर दिया, “जो कुछ तू ने अपने पति की मृत्यु के बाद अपनी सास से किया और तू किस प्रकार अपने माता-पिता और अपनी जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिनको तू पहले न जानती थी, यह सब मुझे पूरी तरह बताया गया है।
12यहोवा तेरे कार्य का फल दे और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे।”
13तब वह बोली, “मेरे प्रभु, तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हुई है और तूने मुझे सान्त्वना दी है और सचमुच अपनी दासी से दयापूर्वक बातें की हैं यघपि मैं तेरी दासियों में से किसी एक के समान भी नहीं हूँ।”
14और भोजन के समय बोअज़ ने उससे कहा, “यहाँ आ, जिससे कि तू रोटी खा सके और अपनी रोटी के टुकड़े को सिरके में डुबा सके।” अतः वह फसल काटने वालों के पास बैठ गई, और उसने उसे भुनी हुई बालें दी और वह खाकर तृप्त हुई वरन् कुछ बचा भी रखा।
15जब वह सीला बीनने को उठी तो बोअज़ ने अपने सेवकों को आज्ञा दी, “उसे पूलों के बीच-बीच में भी बीनने दो और उसे न झिड़को।
16और यह भी कि तुम उसके लिए पूलों में से जान-बूझकर कुछ बालें गिराते जाना कि वह उन्हें बीनती जाए, और उसे न झिड़कना।”
17अतः वह संध्या तक खेत में शीला बीनती रही। तब जो उसने बीना था उसे फटका और वह लगभग एपा भर जौ निकला।
18फिर वह उसे उठाकर नगर में गई, और उसने बीना था उसे उसकी सास ने देखा। और जो कुछ उसने तृप्त होने के बाद बचाया था उसे भी उसने निकालकर नाओमी को दिया।
19तब उसकी सास ने उससे कहा, “आज तूने कहाँ-कहाँ बीना और कहाँ-कहाँ काम किया था? धन्य हो वह जिसने तेरी सुधि ली।” अतः उसने अपनी सास को बता दिया कि उसने किस के पास काम किया था और कहा, “जिस पुरुष के पास आज मैंने काम किया उसका नाम बोअज़ है।”
20और नाओमी ने अपनी बहू से कहा, “वह मनुष्य यहोवा की ओर से आशीष पाए, जिसने न तो जीवित लोगों पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करुणा हटाई।” नाओमी ने उससे फिर कहा, “वह पुरुष तो हमारा कुटुम्बी है, वह हमारे लिए मूल्य देकर छुड़ाने वालों में से एक है।”
21तब मोआबिन रूत बोली, “उसने मुझसे यह भी कहा, ‘तू मेरे सेवकों के साथ तब तक लगी रह जब तक वे मेरी सारी फसल न काट चुकें’।”
22और नाओमी ने अपनी बहू रूत से कहा, “मेरी बेटी, यह अच्छा है कि तू उसकी दासियों के साथ जाया करे, ऐसा न हो कि दूसरे खेत में दूसरे तुझ पर टूट पड़े।”
23अतः वह जौ और गेहूं दोनों की कटनी के अन्त तक सीला बीनने के लिए बोअज़ की दासियों के साथ लगी रही। और वह अपनी सास के साथ रहती थी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)