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पुराना नियम · सपन्याह · अध्याय 2 / 3

सपन्याह 2

1हे निर्लज्ज जाति के लोगो, इकट्ठे हो जाओ,

2इससे पहले कि दण्ड की आज्ञा पूरी हो और दिन भूसी के समान जाता रहे, और इससे पहले कि यहोवा का क्रोध तुम पर आ पड़े और इससे पहले कि यहोवा के क्रोध का दिन तुम पर आ जाए।

3हे पृथ्वी के सब नम्र लोगो, तुम जिन्होंने यहोवा की धर्मविधियों का पालन किया है यहोवा की खोज करो; धार्मिकता की खोज करो, नम्रता को ढूंढ़ो। कदाचित् यहोवा के क्रोध के दिन तुम्हें शरण मिले।

4क्योंकि गाजा त्याग दिया जाएगा, और अश्कलोन उजाड़ हो जाएगा; अश्दोद दिन-दुपहरी निकाल दिया जाएगा, और एक्रोन उखाड़ फेंका जाएगा।

5समुद्र-तट के वासियो, अर्थात् करेती जाति पर, हाय! हे कनान, पलिश्तियों के देश, यहोवा का वचन तेरे विरुद्ध है, मैं तुझे नष्ट कर दूंगा कि तुझमें कोई निवास करनेवाला न रहे।

6समुद्र के तट चरागाह हो जाएंगे, जिनमें चरवाहों के घर और उनके झुंड के लिए बाड़े होंगे।

7और वही समुद्री तट- यहूदा के घराने के बचे हुओं के लिए होगा, वे उस पर चराएंगे। सांझ को वे अश्कलोन के घरों में लेटेंगे; क्योंकि यहोवा उनका परमेश्वर उनकी सुधि लेगा, और उनकी धन-सम्पत्ति पुनः स्थापित करेगा।

8“मैंने मोआबियों के ताने और अम्मोनियों की निन्दा सुनी है जिसके द्वारा उन्होंने मेरे लोगों का उपहास किया है और उनके देश के लिए वे ख़तरा बन गए है,

9इसलिए सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर कहता है, ‘मेरे जीवन की शपथ, निश्चय ही मोआब सदोम की तरह, और अम्मोनी अमोरा के समान बिच्छू पौधों के स्थान और नमक की खदान हो जाएंगे, और निरन्तर उजाड़ रहेंगे। मेरी प्रजा के बचे हुए लोग उन्हें लूटेंगे, और मेरी जाति के बचे हुए। उसके उत्तराधिकारी हो जाएंगे’।”

10यही उनके घमंड का प्रतिफल होगा, क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की प्रजा की निन्दा की और अहंकारी हो गए है।

11यहोवा उन्हें डरावना लगेगा, क्योंकि वह पृथ्वी के सब देवताओं को भूखों मारेगाः और समुद्र-तट की सब जातियां अपने-अपने स्थान से उसे दण्डवत् करेंगी।

12“हे इथियोपिया-वासियो तुम भी मेरी तलवार से घात किए जाओगे।”

13वह उत्तर दिशा की ओर अपना हाथ बढ़ाकर अश्शूर को नष्ट करेगा, और वह नीनवे को उजाड़कर जंगल के समान सुखा देगा।

14सब प्रकार के वन्य पशुओं के झुंड के झुंड उसमें लेटेंगे; उसके खम्भों की चोटी, पर धनेश और साही दोनों बसेरा करेंगे; पक्षी खिड़कियों में चहचहाएंगे, उसकी डेवढ़ियां सूनी पड़ी रहेंगी, क्योंकि उसने देवदार का काम उघड़ा हुआ छोड़ दिया है।

15यह वही उल्लसित नगरी है जो निश्चिंत बैठी रहती और अपने मन में कहती है, “मैं ही हूं मुझे छोड़ कोई है ही नही।” अब वह कैसी उजाड़ हो गई है, और वन-पशुओं के बैठने का स्थान बन गई; हर एक जो वहां से होकर निकलेगा वह सीटी बजाएगा और तिरस्कार से हाथ हिलाएगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)