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पुराना नियम · सपन्याह · अध्याय 3 / 3

सपन्याह 3

1हाय उस पर जो विद्रोही, कलुषित और अत्याचारी नगरी है।

2उसने किसी की बात नहीं सुनी; उसने चेतावनी को भी नहीं माना उसने यहोवा पर भरोसा न रखा वह अपने परमेश्वर के समीप नहीं आई।

3उसके हाकिम गरजते हुए सिंह हैं, उसके न्यायी भेड़िये हैं जो शाम को निकलते हैं और सुबह तक कुछ नहीं छोड़ते।

4उसके नबी बकवादी और विश्वासघाती हैं, उसके याजकों ने पवित्रस्थान को अशुद्ध कर दिया है, और व्यवस्था को तोड़ा-मरोड़ा है।

5यहोवा उसके मध्य धर्मी है; वह कोई अन्याय न करेगा। प्रति भोर वह अपना न्याय प्रकट करता है; वह चूकता नहीं परन्तु अन्यायी को लज्जा नहीं आती।

6मैंने जातियों को नष्ट कर डाला है उनकी कोने की मीनारें खंडहर हो गईं। मैंने उनकी गलियों को उजाड़ दिया; कोई उन पर में से नहीं निकलता; उनके नगर उजाड़ हो गए, उनमें कोई जन नहीं, कोई निवासी नही।

7मैंने कहा, ‘निश्चय तू मेरा आदर करेगी और आदेश मानेगी।’ अतः उसका निवासस्थान नष्ट नहीं किया जाएगा उस सबके अनुसार जो मैंने उसके लिए ठहराया। परन्तु वे फिर भी अपने सब कार्यों को भ्रष्ट करने के लिए उत्सुक थे। इस्रालियों का पुनः ग्रहण किया जाना

8इसलिए यहोवा कहता है, ‘उस दिन तक ठहरे रहो जब तक मैं विनाश करने को न उठूं, निश्चय मैंने ठाना है कि जातियों और राज्योें को एकत्र करूं कि उन पर अपना जलता हुआ क्रोध उंडेलूं, क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से निगल ली जाएगी।

9क्योंकि तब मैं देश-देश के लोगों को शुद्ध किए हुए होंठ दूंगा, जिससे कि वे सब यहोवा से प्रार्थना करें, और कन्धे से कन्धा मिलाकर उसकी सेवा करे।

10इथियोपिया की नदियों के उस पार से तितर-बितर की हुई मेरी प्रजा और मेरे उपासक, मेरे लिए भेंट लाएंगे।

11उस दिन तू अपने सब कामों के कारण जिनके द्वारा तू ने मुझसे विद्रोह किया; लज्जित नहीं होगी। क्योंकि तब मैं तेरे मध्य से घमंड से फूले हुओं को निकाल दूंगा और तुम मेरे पवित्र पर्वत पर फिर कभी अहंकारी नहीं रहोगे।

12परन्तु मैं तेरे मध्य नम्र और दीन लोगों को बचा रखूंगा, और वे यहोवा के नाम में शरण लेंगे।

13तब इस्राएल के बचे हुए लोग कोई कुटिलता न करेंगे और न झूठ बोलेंगे और न उनके मुख से छल की कोई बात निकलेगी; क्योंकि वे खाएंगे और विश्राम करेंगे और कोई उन्हें डराने वाला न होगा।’

14हे सिय्योन की बेटी, हर्ष से पुकार! हे इस्राएल, जय-जयकार कर। हे यरूशलेम की पुत्री, अपने सम्पूर्ण मन से आनन्दित और हर्षित हो!

15यहोवा ने, तेरे विरुद्ध दण्ड का आदेश दूर कर दिया है उसने तेरे शत्रुओं को भी मार्ग से हटा दिया है इस्राएल का राजा, यहोवा तेरे मध्य है अब तू विपत्ति से कभी भयभीत न होगी।

16उस दिन यरूशलेम से कहा जाएगा; “हे सिय्योन मत डर; तेरे हाथ ढीले न पड़े।

17यहोवा तेरा परमेश्वर तेरे मध्य है, वह बचाने वाला पराक्रमी योद्धा है। वह तेरे कारण हर्षित होगा, वह अपने प्रेम के कारण चुप रहेगा, वह हर्ष से जय जयकार करता हुआ तेरे कारण आनन्दित होगा।

18मैं उन लोगों को इकट्ठा करूंगा, जो ठहराए गए पर्व न मना सकने के कारण खेदित हैं, हे सिय्योन, वे तेरे हैं; देश निकाले की नामधराई उन्हें बोझ जान पड़ती है।

19उस समय मैं तुम पर अत्याचार करने वालों को दण्ड दूंगा; मैं लंगड़ों को बचाऊंगा और बहिष्कृत लोगों को इकट्ठा करूंगा, मैं उनकी लज्जा को बदलकर सारी पृथ्वी पर उनकी कीर्ति फैलाऊंगा।

20उस समय मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा और तुम्हें ले आऊंगा जब मैं तुम्हारी आंखों के सामने तुम्हारी धन-सम्पत्ति लौटा दूंगा तब सारी पृथ्वी के सामने मैं निश्चय, तुम्हारी कीर्ति और प्रशंसा फैलाऊंगा, यहोवा का यही वचन है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)