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1 कुरिन्थियों 2:9

पर जैसा लिखा है, ‘‘जिन बातों को आंख ने नहीं देखा और न कान ने सुना, और जो मनुष्य के हृदय में नहीं समाईं, उन्हीं को परमेश्वर ने अपने प्रेम करने वालों के लिए तैयार किया है।’’

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: 1 कुरिन्थियों 2

6फिर भी हम समझदारों में ज्ञान की बातें सुनाते हैं, परन्तु यह ज्ञान न तो इस युग का और न ही इसके शासकों का है जो मिटने वाले है।

7परन्तु हम परमेश्वर के उस ज्ञान के रहस्य का वर्णन करते हैं अर्थात् उस गुप्त ज्ञान का जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया,

8जिस ज्ञान को इस युग के शासकों में से किसी ने न समझाः यदि वे समझ गए होते तो महिमा के प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते।

9पर जैसा लिखा है, ‘‘जिन बातों को आंख ने नहीं देखा और न कान ने सुना, और जो मनुष्य के हृदय में नहीं समाईं, उन्हीं को परमेश्वर ने अपने प्रेम करने वालों के लिए तैयार किया है।’’

10परन्तु परमेश्वर ने उन्हें आत्मा द्वारा हम पर प्रकट किया, क्योंकि आत्मा सब बातों, यहां तक परमेश्वर की गूढ़ बातों को खोजता है।

11मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य के विचारों को जानता है, केवल उस मनुष्य की आत्मा के जो उसमें है? इसी प्रकार परमेश्वर के आत्मा को छोड़ परमेश्वर के विचार कोई नहीं जानता।

12हमने संसार की आत्मा नहीं परन्तु वह आत्मा पायी है जो परमेश्वर की ओर से है जिससे कि हम उन बातों को जान सकें जिन्हें परमेश्वर ने हमें सेंतमेंत दिया है।

पूरा अध्याय पढ़ें: 1 कुरिन्थियों 2

संबंधित पद

  • यशायाह 64:4

    क्योंकि प्राचीनकाल ही से न किसी ने सुना, न ही कानों तक उसकी चर्चा पहुंची और न आंखों से किसी ने तुझे छोड़ ऐसे परमेश्वर को देखा जो अपनी बाट जोहने वालों के लिए कार्य करता हो।

  • याकूब 1:12

    धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है, क्योंकि खरा निकल कर वह जीवन के उस मुकुट को प्राप्त करेगा जिसे प्रभु ने अपने प्रेेम रखने वालों को देने की प्रतिज्ञा की है।

  • रोमियों 8:28

    हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है, अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसके अभिप्राय के अनुसार बुलाए गए है।

  • यशायाह 65:17

    “क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी को सृजता हूं; और पहली बातें स्मरण न की जाएंगी अथवा सोच-विचार में भी न आएंगी।

  • याकूब 2:5

    हे मेरे प्रिय भाइयो, सुनो। क्या परमेश्वर ने इस संसार के निर्धनों को विश्वास में धनी और उस राज्य के उत्तराधिकारी होने के लिए नहीं चुना जिसकी प्रतिज्ञा उसने अपने प्रेम करने वालों से की है?

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).