इफिसियों 2:8
क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है-और यह तुम्हारी ओर से नहीं वरन् परमेश्वर का दान है,
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: इफिसियों 2
5जबकि हम अपने अपराधों के कारण मरे हुए थे उसने हमें मसीह के साथ जीवित किया-अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है-
6और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया और स्वर्गीय स्थानों में बैठाया,
7जिससे कि आने वाले युगों में वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।
8क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है-और यह तुम्हारी ओर से नहीं वरन् परमेश्वर का दान है,
9यह कार्योर्ं के कारण नहीं जिससे कि कोई घमण्ड करे।
10क्योंकि हम उसके हाथ की कारीगरी हैं, जो मसीह यीशु में उन भले कार्योर्ं के लिए सृजे गए हैं जिन्हे परमेश्वर ने प्रारम्भ ही से तैयार किया कि हम उन्हें करे।
11इस कारण स्मरण करो कि तुम जो -शारीरिक रीति से अन्यजाति हो-और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए ख़तने से ख़तनावाले कहलाते हैं, वे तुम को ख़तना रहित कहते है।
संबंधित पद
- रोमियों 3:22–26
अर्थात् परमेश्वर की वह धार्मिकता जो यीशु मसीह में विश्वास द्वारा सब विश्वास करनेवालों के लिए है; यहां कोई भेद-भाव नहीं;
- इफिसियों 2:5
जबकि हम अपने अपराधों के कारण मरे हुए थे उसने हमें मसीह के साथ जीवित किया-अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है-
- रोमियों 4:16
इस कारण, प्रतिज्ञा अनुग्रह के अनुसार विश्वास से मिलती है जिससे कि सब वंशजों के लिए वह निशिचत हो जाए-न केवल उनके लिए जो व्यवस्था वाले हैं, परन्तु उनके लिए भी जो इब्राहीम के समान विश्वास वाले हैं, जो हम सब का पिता है,
- यूहन्ना 1:12–13
परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास करते हैं-
- रोमियों 10:17
अतः विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन के द्वारा होता है।
- रोमियों 10:9–10
कि यदि तू अपने मुख से यीशु को प्रभु जान कर अंगीकार करे, और अपने मन में यह विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे मृतकों में से जीवित किया तो तू उद्धार पाएगा।
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