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गलातियों 5:22

परन्तु पवित्र आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दयालुता, भलाई, विशवस्तता,

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: गलातियों 5

19अब शरीर के काम स्पष्ट हैं, अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, कामुकता,

20मूर्तिपूजा, जादूटोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, मतभेद, फूट,दलबन्दी,

21द्वेज, मतवालापन, रंगरलियां तथा इस प्रकार के अन्य काम हैं जिनके विजय में मैं तुम को चेतावनी देता हूं-जैसा पहले चेतावनी दे चुका हूं-कि ऐसे ऐसे काम करने वाले तो परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी न होंगे।

22परन्तु पवित्र आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दयालुता, भलाई, विशवस्तता,

23नम्रता व संयम है। ऐसे-ऐसे कामों के विरफ़द्ध कोई व्यवस्था नहीं है।

24और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने अपने शरीर को दुर्वासनाओं तथा लालसाओं समेट क्रूस पर चढ़ा दिया है।

25यदि हम पवित्र आत्मा के द्वारा जीवित है तो पवित्र आत्मा के अनुसार चलें भी।

पूरा अध्याय पढ़ें: गलातियों 5

संबंधित पद

  • कुलुस्सियों 3:12–17

    अतः परमेश्वर के उन चुने हुओं के सदृश जो पवित्र और प्रिय हैं, अपने हृदय में सहानुभूति, करुणा, दीनता, विनम्रता और सहनशीलता धारण करो।

  • 1 कुरिन्थियों 13:4–7

    प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है और वह ईर्ष्या नहीं करता। प्रेम डींग नहीं मारता, अहंकार नहीं करता,

  • यूहन्ना 15:5

    मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो। जो मुझमें बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।

  • याकूब 3:17–18

    पर जो ज्ञान ऊपर से आता है, वह पहिले तो पवित्र होता है, फिर मिलनसार, कोमल, विचारशील, करुणामय और अच्छे फलों से लदा हुआ, स्थिर और कपट-रहित होता है।

  • यूहन्ना 15:2

    प्रत्येक डाली जो मुझमें है और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और प्रत्येक डाली जो फलती है उसे वह छांटता है कि और फले।

  • इफिसियों 5:9

    क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, धार्मिकता और सत्य है-

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).