पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 15 / 50
उत्पत्ति 15
1इन बातों के पश्चात् यहोवा का यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुंचाः “अब्राम, मत डर, मैं तेरी ढाल हूं; तेरा प्रतिफल अति महान् होगा।”
2अब्राम ने कहा, “हे प्रभु यहोवा, तू मुझे क्या देगा? मैं तो निर्वंश हूं और मेरे घर का उत्तराधिकारी दमिश्क का एलीएजेर होगा।”
3और अब्राम ने कहा, “इसलिए कि तूने मुझे कोई सन्तान नहीं दी है, मेरे घर में उत्पन्न एक जन मेरा उत्तराधिकारी होगा।”
4तब देखो, यहोवा का वचन उसके पास पहुंचा, “यह मनुष्य तेरा उत्तराधिकारी न होगा; परन्तु जो तुझसे उत्पन्न होगा वही तेरा उत्तराधिकारी होगा।”
5और बाहर ले जाकर उसने उससे कहा, “अब आकाश की ओर देख और यदि गिन सके तो तारों को गिन।” फिर उसने कहा, “तेरा वंश भी ऐसा ही होगा।”
6तब उसने यहोवा पर विश्वास किया और इसे यहोवा ने उसके लिए धार्मिकता गिना।
7उसने उससे कहा, “मैं यहोवा हूं जो तुझे कसदियों के ऊर देश से निकाल लाया हूं कि तुझे इस देश का अधिकार दू।”
8उसने कहा, “हे प्रभु यहोवा, मैं कैसे जानूं कि इस भूमि पर मेरा अधिकार हो जाएगा?”
9तब उसने कहा, “मेरे लिए तीन वर्ष की कलोर, तीन वर्ष की बकरी, तथा तीन वर्ष का मेढ़ा, एक पिंडुक, और कबूतर का एक बच्चा ले आ।”
10तब वह उन सबको उसके पास लाया और उनको दो-दो टुकड़ों में काटकर आमने-सामने रखा, परन्तु उसने चिड़ियों को नहीं काटा।
11जब मांसाहारी पक्षी मांस के टुकड़ों पर झपटे तो अब्राम ने उन्हें उड़ा दिया।
12जब सूर्यास्त होने लगा तो अब्राम को गहरी नींद ने आ घेरा; और देखो, अत्यन्त भय और गहन अन्धकार उस पर छा गया।
13तब परमेश्वर ने अब्राम से कहा, “निश्चयपूर्वक जान ले कि तेरे वंशज एक ऐसे देश में परदेशी होकर रहेंगे जो उनका नहीं है, जहां उन्हें चार सौ वर्ष तक दासत्व में रहना और दुःख सहना होगा।
14परन्तु मैं उस देश को दण्ड भी दूँगा जिसके दासत्व में वे रहेंगेः उसके पश्चात् वे बहुत-सा धन लेकर निकल आएंगे।
15परन्तु तू तो शान्तिपूर्वक अपने पूर्वजों के पास जाएगा; तुझे पूर्ण वृद्धावस्था में मिट्टी दी जाएगी।
16तब चौथी पीढ़ी में वे फिर यहां लौट आएंगे, क्योंकि एमोरियों का अधर्म अब तक पूरा नहीं हुआ।”
17और ऐसा हुआ जब सूर्यास्त हो गया और घोर अन्धकार छा गया तो देखो, धुआं देती हुई एक अंगीठी और जलती हुई एक मशाल दिखाई दी जो उन मांस के टुकड़ों के बीच में से होकर निकल गई।
18उसी दिन यहोवा ने अब्राम से यह कहकर वाचा बांधी, “मिस्र की नदी से लेकर महानदी अर्थात् फ़रात नामक नदी तक की जितनी भूमि है,
19अर्थात् केनियों, कनिज्जियों, कदमोनियों,
20हित्तियों, परिज्जियों, रपाइयों,
21और एमोरियों, कनानियों, गिर्गाशियों, तथा यबूसियों के देश की समस्त भूमि मैंने तेरे वंशजों को दे दी है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)