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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 9 / 50

उत्पत्ति 9

1परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो और बढ़ो और पृथ्वी में भर जाओ।

2तुम्हारा डर और आतंक पृथ्वी के प्रत्येक पशु, आकाश के प्रत्येक पक्षी, भूमि पर रेंगने वाले प्रत्येक जन्तु, और समुद्र की मछलियों पर होगाः ये सब तुम्हारे हाथ में कर दिए गए है।

3हर चलता-फिरता जीवित प्राणी तुम्हारे भोजन के लिए होगा; जैसे कि मैंने तुम्हें हरा साग-पात दिया था वैसे ही अब सब कुछ तुम्हें देता हू।

4केवल तुम मांस को उसके प्राण सहित अर्थात् लहू सहित न खाना।

5और निश्चय ही मैं तुम्हारे प्राण का बदला लूंगा; मैं प्रत्येक पशु से उसका बदला लूंगा, तथा प्रत्येक मनुष्य और उसके भाई-बन्धु से भी मनुष्य के प्राण का बदला लूंगा।

6जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा, उसका लहू मनुष्य द्वारा ही बहाया जाएगा, क्योंकि मनुष्य को परमेश्वर ने अपने स्वरूप में बनाया है।

7और तुम फलदाई बनो और बढ़ो; पृथ्वी पर बहुतायत से सन्तान उत्पन्न करो और उसमें भर जाओ।”

8तब परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों से कहा,

9“देखो, मैं स्वयं तुमसे और तुम्हारे आने वाले वंश से अपनी वाचा स्थापित करता हूं,

10और प्रत्येक जीवित प्राणी से भी जो तेरे संग है, क्या पक्षी, क्या पालतू पशु, और तेरे साथ पृथ्वी के प्रत्येक बनैले पशु, अर्थात् उन सबसे जो जहाज से बाहर निकले हैं, यहां तक कि पृथ्वी के प्रत्येक पशु से भी।

11मैं अपनी वाचा तुम्हारे साथ बांधता हूं, कि फिर कभी सब प्राणी जलप्रलय से नष्ट न होंगे और न कभी पृथ्वी को नष्ट करने के लिए जलप्रलय होगा।”

12और परमेश्वर ने कहा, “जो वाचा मैं अपने और तुम्हारे तथा सब जीवित प्राणियों के साथ जो तुम्हारे संग हैं, सब आने वाली पीढ़ियों के लिए बांध रहा हूं, उसका चिह्न यह होगा।

13मैं बादल में अपना धनुष रखता हूं, और यही पृथ्वी और मेरे मध्य वाचा का चिह्न होगा।

14और जब मैं पृथ्वी पर बादल लाऊंगा तब बादल में यह धनुष दिखाई देगा,

15और मैं अपनी वाचा को स्मरण करूंगा जो मेरे और तेरे और प्रत्येक जीवित शरीरधारी प्राणी के साथ बंधी है; और सब प्राणियों को नष्ट करने के लिए फिर कभी ऐसा जलप्रलय न होगा।

16जब धनुष बादल में प्रकट होगा तब मैं उस चिरस्थायी वाचा को स्मरण करने के लिए उसे देखूंगा जो परमेश्वर और पृथ्वी के सब जीवित प्राणियों के साथ बंधी है।”

17तब परमेश्वर ने नूह से कहा, “यह उस वाचा का चिह्न है जो मैंने अपने और पृथ्वी के सब प्राणियों के मध्य बांधी है।”

18नूह के पुत्र जो जहाज में से बाहर निकले, वे शेम, हाम और येपेत थे। हाम कनान का पिता हुआ।

19नूह के ये तीन पुत्र थे, और इन्हीं से सारी पृथ्वी बस गई।

20तब नूह किसानी करने लगा और उसने दाख-वाटिका लगाई।

21और वह उसकी मदिरा पीकर मतवाला हुआ, और अपने तम्बू के अन्दर नंगा हो गया।

22तब कनान के पिता हाम ने अपने पिता का नंगापन देखा और बाहर जाकर अपने दोनों भाइयों को बताया।

23पर शेम और येपेत ने वस्त्र लिया और दोनों ने उसे अपने कन्धों पर डालकर उलटे पग चलते हुए अपने पिता के नंगेपन को ढांप दिया; और उनके चेहरे फिरे हुए थे इसलिए उन्होंने अपने पिता के नंगेपन को नहीं देखा।

24जब नूह का नशा उतर गया तब उसने जान लिया कि छोटे पुत्र ने मेरे साथ क्या किया है।

25अतः उसने कहा, “कनान शापित हो; वह अपने भाइयों के लिए दासों का दास होगा।”

26उसने यह भी कहा, “शेम का परमेश्वर यहोवा धन्य हो; और कनान उसका दास हो।

27परमेश्वर येपेत को बढ़ाए, वह शेम के तम्बुओं में वास करे; और कनान उसका दास हो।”

28जलप्रलय के पश्चात् नूह तीन सौ पचास वर्ष तक जीवित रहा।

29इस प्रकार नूह की कुल आयु नौ सौ पचास वर्ष की हुई; तत्पश्चात् उसकी मृत्यु हो गई।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)